जगरांव नगर कौंसिल की राजनीति इन दिनों जबरदस्त घमासान में बदल गई है। कांग्रेस के पूर्व प्रधान को कुर्सी से उतारने की कथित साजिश और पार्षदों की खरीद-फरोख्त के गंभीर आरोपों ने पूरे सियासी माहौल को गरमा दिया है। वार्ड नंबर 6 के पार्षद जरनैल सिंह लोहट ने कार्यकारी प्रधान कवरपाल पर जुबानी हमला करते हुए लोकतंत्र की “बोली लगाने” का आरोप लगाया है। अपने वार्ड की समस्याओं को लेकर लोगों के साथ सड़क जाम कर प्रदर्शन कर रहे पार्षद जरनैल सिंह लोहट ने कहा कि नगर कौंसिल के पूर्व प्रधान जतिंदरपाल राना को कुर्सी से हटाने के लिए कुछ पार्षदों ने साजिश रची और नो-कॉन्फिडेंस मोशन लाकर दिसंबर 2022 में वोटिंग के लिए मीटिंग बुलाई गई। लोहट का आरोप है कि वोटिंग से कुछ दिन पहले कार्यकारी प्रधान कवरपाल एक महिला पार्षद के पति को साथ लेकर उनके घर पहुंचे और उन्हें 5 लाख रुपये की पेशकश की, ताकि वह अपनी वोट जतिंदरपाल राना के खिलाफ डाल दें। उन्होंने कहा कि उन्होंने पैसे लेने से साफ इंकार कर दिया और दोनों को घर से बाहर निकाल दिया। पार्षद लोहट ने आरोप लगाया कि वह एससी परिवार से संबंध रखते हैं और कुछ नेता गरीब व एससी समाज के लोगों को “बिकाऊ” समझते हैं। उनका कहना है कि जब उन्होंने पैसे लेने से इंकार कर दिया, तो उसके बाद से उनके खिलाफ राजनीतिक रंजिश निकाली जा रही है। लोहट ने यह भी आरोप लगाया कि जतिंदरपाल राना के पद से हटने के बाद उनके वार्ड के साथ खुला भेदभाव किया जा रहा है। टेंडर पास होने के बावजूद इलाके में विकास कार्य शुरू नहीं किए जा रहे, जिससे लोगों में भारी नाराजगी है। वहीं दूसरी ओर कार्यकारी प्रधान कवरपाल ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। लेकिन भड़के पार्षद लोहट ने खुली चुनौती देते हुए कहा कि वह इस मामले में गुरुद्वारा साहिब जाकर कसम खाने को तैयार हैं और पूछा कि क्या उनके विरोधी भी अपने बच्चों के साथ गुरुद्वारा जाकर सच की कसम खाने को तैयार हैं। पार्षद के इस बयान के बाद जगरांव की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब लोगों के बीच बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि नगर कौंसिल में विकास की राजनीति होगी या फिर विरास कार्य राजनिति की भेंट चढ़ेंगे।