राज्य के बाकी शहरों की तरह फरीदकोट में पिछले 13 दिनों से जारी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल अब प्रशासन और कर्मचारियों के बीच सीधे टकराव का कारण बन गई है। एक ओर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 22 जुलाई तक शहरों से कूड़ा उठाकर सफाई व्यवस्था बहाल करने के निर्देश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर हड़ताली सफाई कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि मांगें पूरी होने तक किसी भी हाल में कूड़ा नहीं उठाने दिया जाएगा। हाईकोर्ट के आदेश के बाद मंगलवार को जिला प्रशासन और नगर काउंसिल की टीम निजी ट्रॉलियों, जेसीबी मशीनों और अन्य संसाधनों के साथ शहर के डंपिंग स्थल पर पहुंची। लेकिन पहले से धरने पर बैठे सफाई कर्मचारियों ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध करते हुए कूड़ा उठाने की कोशिश रोक दी। इस दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया ।हालांकि बाद में धार्मिक स्थल के आसपास कूड़ा हटाने पर सहमति बन गई। शहर में लगातार बढ़ते कूड़े के ढेर अब आम लोगों की परेशानी का कारण बन चुके हैं। कई इलाकों में बदबू और गंदगी से लोगों का जीना मुश्किल हो रहा है, जबकि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ने लगा है। इसी स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और स्थानीय निकायों को तत्काल सफाई व्यवस्था बहाल करने के निर्देश दिए हैं। सफाई कर्मचारी नेता कुलदीप कुमार का कहना है कि कर्मचारी न्यायालय का सम्मान करते हैं, लेकिन सरकार उनकी वर्षों पुरानी मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रही है। कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला, इसलिए आंदोलन जारी रहेगा और मांगें पूरी होने तक कूड़ा नहीं उठाने दिया जाएगा। नगर काउंसिल के कार्यकारी अधिकारी अमृत लाल ने कहा कि प्रशासन केवल हाईकोर्ट के आदेशों का पालन कर रहा है। उनका कहना है कि शहर में बिगड़ती सफाई व्यवस्था और संभावित महामारी जैसे हालात को देखते हुए अदालत ने सख्त निर्देश दिए हैं, इसलिए प्रशासन की प्राथमिकता जनता को राहत देना और सफाई व्यवस्था बहाल करना है।