सिटी रेलवे स्टेशन पठानकोट पर बारिश के बाद रेल ट्रैक पर पानी भर जाने से साथ-साथ शॉर्ट सर्किट जैसी समस्या की आशंका बनी हुई है। रेलवे प्रशासन की ओर से ट्रैक पर जमा पानी की निकासी के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि रेल सेवा को सुचारू रूप से संचालित किया जा सके। हालांकि, इस दौरान रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल भी खड़े हो गए हैं। मौके पर ऐसा नजारा देखने को मिला, जहां छोटे बच्चों से रेलवे ट्रैक से पानी की निकासी का काम करवाए जाने का आरोप सामने आया। बच्चे लोहे के सरियों की मदद से ट्रैक किनारे पड़े पत्थरों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर हटाते हुए दिखाई दिए, ताकि पानी की निकासी का रास्ता बनाया जा सके। बारिश के बीच रेलवे ट्रैक पर इस तरह बच्चों का काम करना उनकी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करता है। रेलवे ट्रैक पर पानी जमा होने के कारण रेल परिचालन में किसी तरह की बाधा या तकनीकी समस्या न आए, इसके लिए पानी निकालना जरूरी है। लेकिन सवाल यह है कि इस कार्य के लिए क्या बच्चों को रेलवे ट्रैक पर लगाया जाना उचित है? यदि बच्चे वास्तव में रेलवे प्रशासन या उसके अधीन काम करने वाले कर्मचारियों के कहने पर यह कार्य कर रहे थे, तो यह मामला ओर भी गंभीर हो जाता है। रेलवे ट्रैक खुद एक संवेदनशील और जोखिम वाला क्षेत्र है। ऐसे में बच्चों को लोहे के सरियों के साथ ट्रैक पर काम करते हुए देखना उनकी सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करता है। मामले में संबंधित अधिकारियों को जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि बच्चों को किसके निर्देश पर इस कार्य में लगाया गया और क्या उनके पास इस तरह का काम करवाने की अनुमति थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे प्रशासन को जलभराव की समस्या से निपटने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों और उचित सुरक्षा व्यवस्था के साथ काम करवाना चाहिए, न कि बच्चों को ऐसे जोखिम वाले स्थान पर काम में लगाया जाए। अब देखना होगा कि रेलवे प्रशासन इस पूरे मामले पर क्या कार्रवाई करता है। वहीं, मौके पर काम करने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि रेलवे ट्रैक पर पानी भर जाने की वजह से शॉर्ट समस्या होने की संभावना रहती है और ट्रैक पर ट्रेन के चलने में मुश्किल बनती है जिस वजह से ट्रैक से पानी को निकाला जा रहा है।