श्री आनंदपुर साहिब के किला श्री आनंदगढ़ साहिब से दशमेश पैदल मार्च के रूप में एक विशाल नगर कीर्तन मस्तुआणा साहिब के लिए रवाना हुआ। नगर कीर्तन के मार्ग में संगत ने जगह-जगह श्रद्धा भाव से सिजदा किया। श्री आनंदपुर साहिब की पावन धरती से रवाना हुए इस नगर कीर्तन में शामिल संगत गुरु गोबिंद सिंह जी के उस ऐतिहासिक समय को याद कर भावुक हो गई, जब सरबंसदानी श्री गुरु गोबिंद सिंह जी परिवार सहित किला छोड़कर आगे बढ़े थे। जिस प्रकार गुरु साहिब ने किला छोड़ा और जिन-जिन मार्गों से आगे बढ़े, उन्हीं मार्गों से संगत ने नगर कीर्तन सजाया। नगर कीर्तन में धन-धन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को सुंदर पालकी में विराजमान किया गया था। इस अलौकिक नगर कीर्तन की अगुवाई पांच प्यारे और पांच निशानची सिंह कर रहे थे। उनके पीछे हजारों की संख्या में संगत “सतनाम वाहेगुरु” का जाप करती हुई उस विरागमयी समय को याद कर रही थी। छोटे-छोटे बच्चों सहित श्रद्धालु नंगे पांव पड़ाव-दर-पड़ाव आगे बढ़ते रहे और गुरु साहिब की अद्वितीय शहादत को नमन करते रहे। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर संगत द्वारा नगर कीर्तन का सिजदा किया गया और श्रद्धालुओं के लिए खाने-पीने की व्यवस्था भी की गई। इस नगर कीर्तन में श्री आनंदगढ़ साहिब से दल पंथ की प्रमुख हस्तियों ने विशेष रूप से भाग लिया। वहीं, तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कौम के नाम संदेश जारी किया। नगर कीर्तन के दौरान सिख श्रद्धालुओं की गुरु साहिब के प्रति आस्था और श्रद्धा बड़े स्तर पर देखने को मिली। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने नगर कीर्तन में भाग लिया।