सरकारी अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे मरीज के लिए अब बीमारी से ज्यादा एमआरआई की तारीख चिंता बढ़ा रही है। पीजीआई में इमरजेंसी मरीजों को जहां 24 से 48 घंटे में एमआरआई मिल रही है, वहीं सामान्य ओपीडी मरीजों को छह महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। जीएमसीएच-32 में भी रूटीन मरीजों की वेटिंग डेढ़ से दो महीने तक पहुंच गई है। बीमारी की पहचान और आगे का इलाज तय करने वाली इस अहम जांच के लिए मरीजों के सामने महीनों इंतजार करने या निजी सेंटर में महंगी जांच कराने की मजबूरी है। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि बीमारी की जांच में ही महीनों लग जाएं तो इलाज में देरी चिंता बढ़ाने वाली है। एमआरआई कई बीमारियों की पहचान और आगे का इलाज तय करने के लिए जरूरी होती है। सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी, ट्रॉमा और भर्ती मरीजों को प्राथमिकता मिलने के कारण सामान्य ओपीडी मरीजों के लिए स्लॉट सीमित रह जाते हैं। पीजीआई में गंभीर और इमरजेंसी मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर 24 से 48 घंटे में जांच मिल रही है, जबकि सामान्य मरीजों की वेटिंग लंबी है।