पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और धार्मिक भावनाओं से जुड़े सबसे संवेदनशील मामले बहिबल कलां गोलीकांड में मारे गए दो प्रदर्शनकारियों के परिजनों को आज तक इन्साफ नहीं मिल पाया है। अक्तूबर 2015 में हुई इस घटना के बाद से 11 साल के दौरान अब तक तीन मुख्यमंत्री (प्रकाश सिंह बादल, कैप्टन अमरिंदर सिंह व चरणजीत सिंह चन्नी) बदल चुके हैं। इसी घटना व इससे जुड़े अन्य प्रकरणों में आठ बार एसआईटी जांच हो चुकी है। एक बार जस्टिस रणजीत सिंह आयोग जांच कर चुका है। कुल सात एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं, आठ अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ चालान पेश हो चुके हैं मगर न तो आज तक कोई दोषी साबित हुआ और न ही किसी को सजा मिल पाई। इसमें कोई दोराय नहीं है कि विधानसभा चुनाव से पहले यह प्रकरण बड़ा सियासी मुद्दा बनता आया है। हर सरकार इस प्रकरण के दोषियों को सजा दिलाकर सलाखों के पीछे करने का दम भरती है। अब पंजाब में विधानसभा चुनाव को करीब छह माह बचे हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भी इस मामले में डीआईजी हरजीत सिंह की अगुवाई में नई एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) गठित कर दी है। नई गठित एसआईटी ने हाल ही में घटनास्थलों का दोबारा दौरा कर सीन री-क्रिएट किया है और कड़ियों को जोड़ने के लिए तत्कालीन गृह मंत्री समेत अन्य लोगों से पूछताछ कर रही है, ताकि यह साफ हो सके कि उस रात गोली चलाने के अंतिम आदेश किसने दिए थे। संबंधित इलाके के लोगों से नाम गोपनीयता की शर्त पर आकर एसआईटी के समक्ष बयान देने के लिए अपील की जा रही है। फिलहाल यह मामला पूरी तरह सुर्खियों में हैं और इस पर जमकर सियासत भी हो रही है।