शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की ओर से देश-विदेश की संगत के सहयोग से चौथे पातशाह श्री गुरु रामदास जी का प्रकाश पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर कनाडा से पहुंचे अंतरराष्ट्रीय प्रचारक भाई बलबीर सिंह चंगियाड़ ने संगत को गुरु साहिब के जीवन इतिहास और उनकी शिक्षाओं से अवगत करवाया। भाई बलबीर सिंह ने बताया कि श्री गुरु रामदास जी का जन्म लाहौर की चूना मंडी में पिता हरदास जी और माता दया कौर जी के घर हुआ था। बचपन में माता-पिता के देहांत के बाद उनकी नानी उन्हें बासरके ले आईं। बाद में वह गोइंदवाल साहिब पहुंचे और तीसरे पातशाह श्री गुरु अमरदास जी की सेवा में जुट गए। उनकी सेवा से प्रसन्न होकर गुरु अमरदास जी ने अपनी पुत्री बीबी भानी जी का विवाह उनके साथ किया और उन्हें गुरुगद्दी की बख्शीश की। उन्होंने कहा कि श्री गुरु रामदास जी ने अमृतसर की पवित्र धरती पर गुरु का चक्क बसाया, जो आज विश्वभर की संगत के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। श्री हरिमंदिर साहिब के चारों दरवाजे सभी धर्मों, जातियों और वर्गों के लोगों के लिए खुले हैं। यह समानता, भाईचारे और सर्व-सांझीवालता का संदेश देते हैं। इस दौरान उन्होंने 74 दिन भूख हड़ताल के बाद शहादत प्राप्त करने वाले सरदार दर्शन सिंह फेरूमन को भी श्रद्धांजलि दी। अंत में उन्होंने एसजीपीसी पदाधिकारियों और समूची संगत को गुरु पर्व की बधाई दी।