प्रसिद्ध पंजाबी सूफी गायक हंस राज हंस ने शुक्रवार को श्री हरिमंदिर साहिब में माथा टेककर अरदास की। गुरु घर में नतमस्तक होने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि यहां आकर जो आत्मिक शांति मिलती है, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “जैसे गूंगा गुड़ खाकर उसका स्वाद नहीं बता सकता, वैसे ही यहां की इलाही कृपा को शब्दों में व्यक्त करना कठिन है।” राजनीति को लेकर पूछे गए सवाल पर हंस राज हंस ने कहा कि वह कभी पेशेवर राजनेता नहीं रहे। यह महज एक ‘कर्म चक्र’ था, जो अब पीछे छूट चुका है। उन्होंने कहा कि अब उन्होंने खुद को पूरी तरह से परमात्मा और संगत के हवाले कर दिया है। अपने संगीत सफर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि संगीत ही उनकी असली पहचान और जिंदगी है। उन्होंने युवाओं और उभरते गायकों को नशे से दूर रहने और नियमित व्यायाम करने की सलाह दी। फिल्मों में वापसी के संकेत देते हुए उन्होंने कहा कि उम्र के अनुरूप कोई अच्छा प्रस्ताव मिला तो वह बड़े पर्दे पर जरूर नजर आएंगे। अमृतसर की धरती का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह वही भूमि है, जहां दारा सिंह जैसे महान पहलवान पैदा हुए। इसलिए युवाओं को अपने स्वास्थ्य और विरासत के प्रति सजग रहना चाहिए।