सिख पंथ की प्रमुख संस्था एसजीपीसी द्वारा सभी सेवाओं से मुक्त किए जाने के फैसले पर पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इस निर्णय का स्वागत करते हैं और इसे सिर झुकाकर स्वीकार करते हैं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि 26 फरवरी को हुई एसजीपीसी की बैठक में 72 घंटे के अल्टीमेटम के बाद उन्हें औपचारिक रूप से सेवाओं से मुक्त करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि जो गुरु रामदास साहिब का हुक्म है, वही होगा। मुझे किसी प्रकार की कोई शिकायत नहीं है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान स्थिति की पृष्ठभूमि दो दिसंबर को श्री अकाल तख्त साहिब से लिए गए फैसलों से जुड़ी है। उनके अनुसार उस दिन गुरु ग्रंथ साहिब की हजूरी में पंथक मर्यादा के अनुरूप निर्णय लिए गए थे और वह उन पर आज भी कायम हैं। पूर्व जत्थेदार ने आरोप लगाया कि उनसे पहले भी कई धार्मिक पदाधिकारियों को हटाया गया और उन पर भी विभिन्न प्रकार के दबाव बनाए गए। उन्होंने कहा कि उनसे कुछ विशेष बयान देने और कुछ निर्णयों से सहमत होने के लिए कहा गया, यहां तक कि चंडीगढ़ से आदेश आने की बात भी कही गई। लंगर घोटाले और अन्य आर्थिक अनियमितताओं पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि उनके पास पुख्ता दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें वह चरणबद्ध तरीके से संगत के सामने रखेंगे। उन्होंने कहा कि गुरु की गोलक की लूट किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एसजीपीसी एक पवित्र संस्था है, जिसकी स्थापना शहीदों की कुर्बानियों से हुई है, लेकिन मौजूदा प्रबंधन प्रणाली में खामियां आ गई हैं। उन्होंने दोहराया कि वह फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन संगत के हितों से जुड़े मुद्दों को उठाते रहेंगे।