शिवसेना की दशहरा रैली बुधवार को हुई। 56 साल में पहली बार एक नहीं दो दशहरा रैलियों का आयोजन शिवसेना में हुआ। एक को उद्धव ठाकरे ने संबोधित किया तो दूसरी को एकनाथ शिंदे ने। शिंदे के मंच पर उद्धव ठाकरे के सगे भाई जयदेव ठाकरे, उद्धव की भाभी स्मिता ठाकरे और उनके बेटे भी पहुंचे। ठाकरे परिवार की इस टूट के कई मायने निकाले जा रहे हैं। दोनों भाषणों के भी राजनीतिक मायने तलाशे जा रहे हैं? जल्द ही बीएमसी चुनाव होने हैं। जहां वर्षों से शिवसेना का दबदबा है। इस रैली का बीएमसी चुनाव में क्या असर पड़ेगा?