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Ujjain News: महाकाल मंदिर में सोमनाथ के पुरातात्विक अवशेषों के दिव्य शिवलिंगों का मिलन, गर्भगृह में हुआ पूजन

Sun, 14 Dec 2025 03:20 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

आर्ट ऑफ लिविंग मुख्यालय (बेंगलुरु) से भगवान सोमनाथ के पुरातात्विक 11 अवशेषों (बाण लिंग) से निर्मित दो विशेष शिवलिंग आज श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकालेश्वर की भोग आरती में लाए गये। आरती के पश्चात दोनों शिवलिंग का गर्भगृह में पूजन किया गया, जिसके पश्चात दोनों शिवलिंगों को जूना महाकाल मंदिर परिसर में कुछ समय के लिए दर्शनार्थीयों के दर्शन लाभ हेतु रखा गया। आर्ट ऑफ लिविंग के डायरेक्टर दर्शक हाथी एवं मध्यप्रदेश यात्रा प्रभारी मनीष सोनी ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सतयुग में चन्द्रदेव द्वारा निर्मित सोमनाथ मंदिर का शिवलिंग महमूद गजनी के आक्रमण के पश्चात खंडित हो गया। अग्रिहोत्री पुरोहितों ने खंडित अवशेषों से 11 छोटे वाण शिवलिंग बनाकर पीढ़ियों तक गुप्त रूप से उनकी पूजा की। वर्ष 1924 में कांची शंकराचार्य के निर्देशानुसार, सौ वर्ष पश्चात संरक्षक पुरोहित सीताराम शास्त्री ने ये शिवलिंग आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक रवि शंकर गुरुदेव को सौंप दिए। इसी क्रम में सभी शिवलिंगों का भारत भ्रमण किया जा रहा है। इनमें से दो शिवलिंग मध्यप्रदेश में दर्शन एवं भ्रमण हेतु लाए गए हैं, जिनके भ्रमण की शुरुआत श्री महाकालेश्वर मंदिर से की गई। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से महानिर्वाणी अखाड़ा श्री महाकालेश्वर मंदिर के महंत विनीत गिरी महाराज एवं सहायक प्रशासक आशीष फलवाडिया द्वारा यात्रा में सम्मिलित सभी सदस्यों का स्वागत एवं सत्कार किया गया।



19 को ओंकारेश्वर जाएंगे शिवलिंग
उज्जैन से यात्रा इंदौर जाएगी और 14 दिसंबर की शाम यहां गांधी हॉल में रुद्रपूजा होगी। 17 दिसंबर को यात्रा महू जाएगी और चक्की वाले महादेव मंदिर में सार्वजनिक पूजन होगा। 19 दिसंबर को शिवलिंगों का ओंकारेश्वर में भगवान ओंकार के साथ मिलन होगा। यात्रा यहां से आलीराजपुर, बुरहानपुर, भोपाल, बैतूल होते हुए जबलपुर जाएगी।

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क्यों हैं दिव्य शिवलिंग
आर्ट ऑफ लिविंग की मोनल पटेल ने बताया कि बैंगलुरु से आने वाले यह शिवलिंग इस मायने में दिव्य हैं, क्योंकि यह सोमनाथ ज्योर्तिलिंग के अवशेष से बने हैं। चुंबकीय प्रभाव के कारण जमीन से ऊपर रहने वाले इस ज्योर्तिलिंग को सन 1026 में महमूद गजनवी से नष्ट कर दिया था। शिवलिंग के टूटे अवशेषों को अग्निहोत्री ब्राह्मणों ने अपने पास सुरक्षित रख लिया था। इनकी संख्या 11 थीं। इन अवशेष को उन्होंने 1924 में कांची कामकोटि के तत्कालीन शंकराचार्य को सौंपा था। तब शंकराचार्य जी ने उनसे कहा था कि 100 साल बाद इन अवशेषों को बैंगलुरु में आश्रम स्थापित करने वाले वाले शंकर को सौंप देना। नकी आज्ञा का पालन करते हुए पुरोहित सीताराम शास्त्री ने इन अवशेषों को आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री रविशंकर को सौंपा था। इन अवशेष से ही 11 शिवलिंग तैयार किए गए हैं। इनमें से 2 उज्जैन आ रहे हैं।

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