टीकमगढ़ जिले के पुलिस अधीक्षक मनोहर सिंह मंडलोई ने शुक्रवार की दोपहर मामले का खुलासा करते हुए बताया कि टीकमगढ़ जिले के पलेरा पुलिस थाने को 17 दिसंबर की सुबह सूचना मिली थी कि गोना गांव में बुजुर्ग दंपती घायल अवस्था में पड़े हुए हैं। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो बुजुर्ग बिहारी की घटनास्थल पर मौत हो गई थी, जबकि उनकी पत्नी की सांसे चल रही थी, जिन्हें प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी सरकारी अस्पताल पलेरा भेजा गया। वहां पर प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल और जिला अस्पताल के बाद झांसी मेडिकल कॉलेज इलाज के लिए भेजा गया था, जहां 17 दिसंबर की शाम को उनकी मौत हो गई थी। इस मामले में अज्ञात आरोपी के खिलाफ पुलिस ने हत्या और लूट का मामला दर्ज किया था।
चार टीमों का किया गया था गठन
टीकमगढ़ के पुलिस अधीक्षक मनोहर सिंह मंडलोई ने बताया कि इस घटना के खुलासे के लिए उन्होंने स्वयं घटनास्थल का मुआयना किया था और चार पुलिस टीमों का गठन किया गया था। उन्होंने बताया कि शक की सुई सबसे पहले उसके भतीजे मूलचंद अहिरवार पर गई, जिससे पुलिस अभीरक्षा में लिया गया और पूछताछ की गई तो उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसने बताया कि मृतक बिहारी अहिरवार सरकारी नौकरी से सेवानिवृत हुआ था और उसके पास पैसा रहता था और उसे हर माह पेंशन मिलती थी। घटना दिनांक की रात को भतीजा और आरोपी मूलचंद अहिरवार अपने चाचा चाची के घर गया और पैसे की मांग की। जब चाचा ने पैसे देने से मना कर दिया तो आरोपी भतीजे मूलचंद ने कुल्हाड़ी से दोनों के ऊपर हमला कर दिया, जिसमें घटनास्थल पर बिहारी अहिरवार की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी घायल हो गई, जिनकी झांसी में इलाज के दौरान मौत हो गई।
आरोपी की गिरफ्तारी
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी कर ली गई है और आरोपी के पास से हत्या में उपयोग की गई कुल्हाड़ी को बरामद किया गया है और लूट के 70000 रुपए बरामद किए गए हैं। उन्होंने बताया कि करीब चार-पांच साल पहले भी भतीजे ने मृतक के पैसे चोरी कर लिए थे। इसके बाद दोनों के बीच समझौता हो गया था क्योंकि यह पारिवारिक मामला था।