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Sehore News: नक्शा सुधार में देरी पूछी तो पटवारी ने जड़ा थप्पड़; तहसील में बैठी रोती रही पीड़िता, वीडियो वायरल

Thu, 06 Nov 2025 04:37 PM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर

सीहोर जिले की भैरुंदा तहसील के पांचोर गांव से एक दर्दनाक घटना ने शासन-प्रशासन के कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खेत का नक्शा सुधार कराने गई महिला हितग्राही को न्याय के बजाय अपमान और हिंसा का सामना करना पड़ा। महिला का कहना है कि वह पिछले चार महीनों से तहसील के चक्कर लगा रही थी, लेकिन पटवारी बार-बार टालमटोल कर रही थी। वीडियो में पटवारी के द्वारा हितग्राही पर हाथ उठाने का प्रयास किया गया। वहीं साथ में आए बालक को थप्पड़ जड़ दिया। इस दौरान एक घंटे से भी अधिक समय तक विवाद की स्थिति बनी रही।

पांचोर निवासी साक्षी मेहरा ने बताया कि उसने अपने खेत का नक्शा दुरुस्त करवाने के लिए करीब चार माह पहले आवेदन दिया था। हर बार पटवारी कल आना कहकर टाल देती थीं। मंगलवार को वह अपने मामा के साथ पहुंची और देरी का कारण पूछा। इसी दौरान हल्का नंबर 45 की पटवारी अंतिम धुर्वे ने गुस्से में साथ आए बालक पर थप्पड़ जड़ दिया और उसे भी मारने का प्रयास किया। साक्षी ने बताया कि यह अपमान उसके लिए असहनीय था, क्योंकि उसने कभी नहीं सोचा था कि शासन की कर्मचारी उसके साथ इस तरह का व्यवहार करेगी।

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विवाद का वीडियो वायरल, सोशल मीडिया पर आक्रोश
घटना का वीडियो गुरुवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में पटवारी के बीच तीखी बहस के साथ हाथापाई की स्थिति देखी जा सकती है। यह दृश्य देखकर लोग हैरान हैं कि एक सरकारी दफ्तर में इस तरह की घटनाएं खुलेआम घटित हो रही हैं। वीडियो के सामने आने के बाद लोगों ने तहसील कार्यालय में कर्मचारियों के रवैये पर भी सवाल उठाए हैं।

तहसीलदार बोले-मामले की जांच होगी, दोषी नहीं बचेगा
भैरुंदा तहसीलदार सौरभ शर्मा ने मामले का संज्ञान लेते हुए कहा कि वायरल वीडियो की जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि महिला हितग्राही की लिखित शिकायत दर्ज की गई है और यदि पटवारी दोषी पाई जाती है तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। तहसीलदार ने यह भी कहा कि कार्यालय में आने वाले प्रत्येक हितग्राही के साथ संवेदनशील व्यवहार करना हर कर्मचारी का कर्तव्य है।

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शासन के नियमों के बावजूद नहीं मिला न्याय
राज्य शासन के निर्देशों के अनुसार किसी भी राजस्व संबंधी आवेदन का निराकरण तय समयसीमा में किया जाना अनिवार्य है। बावजूद इसके साक्षी मेहरा जैसे कई हितग्राही महीनों तक फाइलों में उलझे रहते हैं। न तो कोई जवाब मिलता है और न ही कार्य समय पर होता है। इस लापरवाही और अपमान ने न केवल पीड़िता को आहत किया है बल्कि सरकारी व्यवस्था पर भी जनता का भरोसा कमजोर किया है।

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