सागर के ऐतिहासिक श्री देव अटल बिहारी मंदिर में रंग पंचमी का विशेष आयोजन किया गया, जिसमें केवल महिलाओं ने ठाकुर जी के साथ रंग और गुलाल खेला। इस मंदिर की परंपरा के अनुसार, पुजारी भगवान की ओर से महिलाओं पर पिचकारी से रंग डालते हैं और गुलाल उड़ाते हैं। इस दौरान महिलाएं गोपी भाव में फागुन के गीत गाती हैं, नृत्य करती हैं और ब्रज-वृंदावन जैसा आध्यात्मिक आनंद अनुभव करती हैं।
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50 वर्षों से चली आ रही परंपरा
बुंदेलखंड में करीब 50 साल पहले महिलाएं सामाजिक मर्यादा के कारण बिना घूंघट घर से बाहर नहीं निकलती थीं। ऐसे में महिलाओं को स्वतंत्र रूप से त्योहार मनाने का अवसर देने के लिए रंग पंचमी का दिन विशेष रूप से उनके लिए सुरक्षित रखा गया। इस परंपरा के तहत महिलाएं और बेटियां पूरी तरह से कृष्ण भक्ति में लीन होकर फाग के गीतों का आनंद लेते हुए रंग-गुलाल खेलती हैं। इस उत्सव में पुरुषों को मर्यादा का पालन करना होता है।
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गोपियों की भक्ति भावना
मंदिर में भगवान के साथ होली खेलने आई महिलाएं इसे एक आध्यात्मिक अनुभव मानती हैं। उनके अनुसार, भगवान के साथ रंग खेलने का यह अवसर उन्हें गोपिका भाव में भक्ति का अनुभव कराता है। इस दिन सागर के इस 300 वर्ष पुराने देव अटल बिहारी मंदिर में वृंदावन की अनोखी झलक देखने को मिलती है। भक्तों का मानना है कि इस आयोजन में शामिल होने से भक्ति, प्रेम और उल्लास की अनुभूति होती है।