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Sagar News: गणतंत्र दिवस पर सेंट्रल जेल से रिहा हुए नौ बंदी, जेल में सीखे हुनर से अब संवारेंगे अपनी गृहस्थी

Mon, 26 Jan 2026 04:34 PM IST
सागर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर

गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर सागर केंद्रीय जेल में खुशी का माहौल रहा। जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे नौ बंदियों को अच्छे आचरण और जेल नियमों के तहत रिहाई मिली है। ये सभी बंदी हत्या (धारा 302) के मामले में सजा काट रहे थे। जेल से बाहर निकलते समय इन बंदियों के चेहरों पर जहां एक ओर अपनों से मिलने की खुशी थी, वहीं दूसरी ओर आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी दिखाई दिया।

जेल में बने 'हुनरमंद', खाते में जमा है कमाई की राशि
जेल में बिताए समय के दौरान इन बंदियों ने केवल सजा नहीं काटी, बल्कि पुनर्वास के लिए कई तरह के तकनीकी काम भी सीखे। जेल प्रशासन ने इन्हें टेलरिंग (सिलाई), कारपेंटरी (बढ़ईगिरी), लोहारी, भवन निर्माण, प्रिंटिंग प्रेस, हथकरघा और बुनाई जैसे उद्योगों का गहन प्रशिक्षण दिया। विशेष बात यह है कि जेल में काम करने के बदले इन्हें जो पारिश्रमिक मिला, वह सीधे इनके बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया है। अब रिहाई के बाद ये बंदी इस जमा पूंजी से अपना नया व्यवसाय शुरू कर सकते हैं या इसे अपने परिवार की बेहतरी में लगा सकते हैं।

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जेल अधीक्षक की भावुक अपील: 'समाज निर्माण में बनें सहभागी'
सागर केंद्रीय जेल अधीक्षक मानेन्द्र सिंह परिहार ने रिहा होने वाले सभी बंदियों को शुभकामनाएं दीं और उनसे दोबारा अपराध की राह पर न चलने की अपील की। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि जेल में रहते हुए आपने जो कौशल और प्रशिक्षण प्राप्त किया है, उसका उपयोग आप अपने परिवार की रोजी-रोटी चलाने और एक सभ्य समाज के निर्माण में करेंगे। अब आपकी नई जिंदगी की शुरुआत हो रही है।

रिहा होने वाले बंदियों की सूची
रोने उर्फ रोहन (पिता हरिराम आदिवासी)
श्यामलाल (पिता झम्मू आदिवासी)
ध्रुव सिंह (पिता परमलाल लोधी)
लक्ष्मण (पिता बन्दू रजक)
रज्जन उर्फ राजकुमार (पिता मन्नूलाल रैकवार)
मस्ताना उर्फ गोविन्द (पिता मुन्ना रैकवार)
कालका (पिता बैजनाथ कुशवाहा)
पल्टू उर्फ परसराम (पिता चूरामन पटैल)
राजेन्द्र (पिता भारत सिंह लोधी)

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अब साल में 5 दिन मिलेगी रिहाई की सौगात
जेल नियमों में हुए बदलाव की जानकारी देते हुए बताया गया कि पहले बंदियों को केवल गणतंत्र दिवस, अम्बेडकर जयंती, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती पर ही विशेष पात्रता के आधार पर रिहा किया जाता था। लेकिन अब सरकार ने इसमें एक और गौरवशाली दिन जोड़ दिया है। अब 15 नवंबर (राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस) के मौके पर भी आजीवन कारावास के पात्र बंदियों को रिहाई मिल सकेगी।

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