मध्य प्रदेश के सागर जिले से गुरुवार को एक सनसनीखेज मामला सामने आया। पुलिस प्रताड़ना से परेशान एक युवक अपनी पत्नी और ढाई साल की मासूम बच्ची के साथ बीएसएनएल के ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गया। करीब 45 डिग्री तापमान और तेज धूप के बीच परिवार घंटों टावर पर बैठा रहा। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया और मौके पर बड़ी संख्या में अधिकारी पहुंच गए।
टावर पर चढ़े युवक की पहचान बलराम अहिरवार के रूप में हुई है। बलराम ने आरोप लगाया कि मोतीनगर थाना प्रभारी जसवंत राजपूत और उनके अधीनस्थ पुलिसकर्मियों ने उसे थाने में बेरहमी से पीटा और झूठे मामले में फंसा दिया। युवक का कहना था कि जब तक थाना प्रभारी को निलंबित कर कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक वह परिवार सहित नीचे नहीं उतरेगा।
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मौके पर मौजूद बलराम के छोटे भाई ने मीडिया को बताया कि पुलिस ने उसके भाई को जबरन थाने बुलाकर मारपीट की और बाद में झूठी एफआईआर दर्ज कर जेल भेज दिया। उसने आरोप लगाया कि पुलिस के कथित अत्याचार से परेशान होकर बलराम ने यह कदम उठाया।
शाम करीब साढ़े छह बजे तक बलराम अपनी पत्नी कृष्णा देवी और बच्ची के साथ टावर पर डटा रहा। मासूम बच्ची की सुरक्षा को देखते हुए नीचे विशेष इंतजाम किए गए थे ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके। प्रशासनिक अधिकारी लगातार मोबाइल फोन के जरिए युवक से संपर्क कर उसे समझाने का प्रयास करते रहे।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने सेना की मदद भी ली। रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए सैन्य कर्मी मौके पर पहुंचे। बाद में अधिकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद युवक के भाई को टावर पर भेजा गया, जिसने परिवार को समझाकर सुरक्षित नीचे उतार लिया। परिवार के सुरक्षित नीचे आने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली। हालांकि इस घटना के बाद स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।