थाना कोतवाली पुलिस ने एक बड़ी सायबर ठगी का पर्दाफाश करते हुए उस गिरोह का खुलासा किया है, जो वॉट्सएप पर खरगोन कलेक्टर भव्या मित्तल की फोटो लगाकर लोगों से पैसों की मांग कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में अब तक कुल नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक महिला और 2 विधिविरुद्ध बालक शामिल हैं। आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने धोखाधड़ी कर निकाले गए एक लाख रुपये भी बरामद कर लिए हैं।
टीआई बीएल मंडलोई ने बताया कि 25 अक्टूबर को एक फरियादी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि अज्ञात व्यक्ति ने मोबाइल नंबर +84339410118 से कलेक्टर की डीपी लगाकर उससे एक लाख रुपये मांगे और वह उसके झांसे में आकर पैसे ट्रांसफर कर बैठा। शिकायत के आधार पर थाना कोतवाली में अपराध दर्ज किया था।
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पुलिस अधीक्षक रविन्द्र वर्मा, एएसपी बिट्टू सहगल और एसडीओपी रोहित लखारे के मार्गदर्शन में साइबर सेल व कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम बनाई गई। टीम ने तुरंत सभी संबंधित बैंक खातों को फ्रीज कराया और तकनीकी जांच शुरू की। जांच में पता चला कि ठगी की राशि मुंबई निवासी ग्लोरिया फर्नांडिस के खाते में गई है। पूछताछ में उसने बताया कि उसने अपना बैंक खाता और सिम ऑनलाइन मिले एक परिचित के कहने पर दिल्ली भेज दिया था।
रीवा से निकली बड़ी कड़ी, एटीएम से निकाली राशि
राशि कई खातों में ट्रांसफर होने के बाद रीवा के एटीएम से निकाली गई थी। इसके आधार पर पुलिस ने रीवा पुलिस की मदद से 6 अन्य आरोपियों को पकड़ा, जिनमें दो नाबालिग भी शामिल हैं। पूछताछ में सामने आया कि ठग पंकज पटेल और दीपक पटेल के लिए किराए और कमिशन पर बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। बाद में पुलिस ने दोनों मुख्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया। गिरोह से जुड़े कुल नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें ग्लोरिया फर्नांडिस निवासी मुंबई, शिवांश सिंह यादव, शिवेंद्र वर्मा, रोहित यादव, विनीत चौहान, पंकज पटेल, दीपक पटेल सभी निवासी रीवा तथा दो विधिविरुद्ध बालक शामिल हैं।
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पुलिस ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी सोशल मीडिया डीपी देखकर भरोसा न करें। पैसे भेजने से पहले संबंधित व्यक्ति से उसके असली नंबर पर बात करें। बैंक या निजी जानकारी कभी साझा न करें। किसी भी साइबर ठगी की शिकायत तुरंत 1930 या साइबर क्राइम पुलिस को दर्ज करें।