दमोह जिले के वन परिक्षेत्र सिग्रामपुर के पोड़ी गांव में रविवार दोपहर एक खेत में पांच फीट लंबा मगरमच्छ आ गया। मगरमच्छ की फुसकार सुन खेत पहुंचे किसान के होश उड़ गए और वह जान बचाकर भागा। इसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दी गई। जिस पर वन विभाग की टीम ने सक्रियता दिखाते हुए ग्रामीणों की मदद से मगरमच्छ का रेस्क्यू अभियान शुरू किया। करीब दो घंटे के इस अभियान में वन विभाग की टीम ने मगरमच्छ को पिंजरे में कैद करने के बाद जलाशय में छोड़ दिया।
बताया गया है कि यह मगरमच्छ पहले पोड़ी गांव की एक तलैया में दिखाई दिया था। जिससे ग्रामीण दहशत में थे और उसकी सूचना बन विभाग को देने के बाद विभाग ने तालाब किनारे पिंजरे लगाए थे, लेकिन मगरमच्छ पिंजरे में नहीं फंसा और तालाब से निकलकर खेतों में घूमने लगा जो रविवार को एक किसान के खेत में पहुंच गया। ग्रामीणों ने वन विभाग की सूचना दी जिसके बाद बीट गार्ड अरविंद राय, तारा सिंह और ग्रामीणों की मदद से वन विभाग ने मगरमच्छ को सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया और रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के सिंगौरगढ़ जलाशय में सुरक्षित छोड़ दिया गया। मगरमच्छ के पकड़े जाने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। मगरमच्छ को जब जलाशय में छोड़ने ले जाया गया तो वह पिंजरे से नहीं निकल रहा था। पीछे से वन कर्मियों ने लकड़ी के सहारे उसे जलाशय में धकेला।
ब्यारमा नदी से पकड़े गए चार मगरमच्छ
बता दें दमोह जिले की व्यारमा नदी में बहुत अधिक संख्या में मगरमच्छ हैं। मगरमच्छ के हमले से दो लोगों की जान भी चली गई और करीब एक दर्जन लोग घायल हो चुके हैं। जिसके बाद वन विभाग ने नोहटा से निकली ब्यारमा नदी में पिंजरे लगाकर चार मगरमच्छों को पकड़कर उन्हें भोपाल वन बिहार भिजवाया गया।