वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर एक्शन को लेकर काशी से लेकर एमपी तक सियासत गरमा गई है.. खबर है कि काशी में देवी अहिल्या द्वारा बनाए गए मणिकर्णिका महाश्मशान घाट को प्रशासन ने तुड़वा दिया है। साथ ही घाट पर लगी देवी अहिल्या की प्रतिमा भी तोड़ दी गई है। इससे नाराज काशी का बड़ा तबका विरोध दर्ज कराने पहुंच गया... वहीं जब इसकी जानकारी इंदौर के लोगों को मिली तो उन्होंने इसका विरोध जताया और दोषियों के खिलाफ एक्शन लेने की मांग की है... हालांकि इसको लेकर एक तरफ जहां आंदोलन की तैयारी की जा रही है तो दूसरी तरफ डीएम सत्येंद्र कुमार का बयान सामने आया है जिमसें उन्होंने बताया कि मणिकर्णिका घाट से मिलीं मूर्तियां और कलाकृतियां संरक्षित की जाएंगी। इनमें रानी अहिल्याबाई की मूर्ति भी शामिल है... उन्होंने बताया कि मणिकर्णिका घाट पर विकास कार्य कराए जा रहे हैं। इससे किसी मंदिर को नुकसान नहीं पहुंचा है.. पहले चरण में सीढि़यां बनवाई जा रही हैं। खोदाई के दौरान कुछ मूर्तियां और कलाकृतियां मिली हैं। इन्हें संरक्षित कराया गया है। घाट पर निर्माण कार्य पूरा होने के बाद मूर्तियां लगवाई जाएंगी...
दरअसल मणिकर्णिका घाट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ.. जिसमें बुलडोजर चलता हुआ दिखाई दे रहा है। वीडियो में आवाज सुनाई दे रही है कि “विकास के नाम पर विनाश, देखिए कैसे मंदिर गिराए जा रहे हैं। वीडियो के वायरल होते ही राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं... वीडियो में देवी अहिल्याबाई की प्रतिमा दिख रही है, जिसका विरोध बनारस से इंदौर तक हो रहा है..जबकि प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। जिला प्रशासन का दावा किया कि मणिकर्णिका घाट पर किसी भी मंदिर को नहीं तोड़ा गया है। बल्कि यहां अत्याधुनिक शवदाह गृह का निर्माण एक अलग एजेंसी करा रही है... फिलहाल इस मामले पर इतिहासकार..नेताओं...और अधिकारियों का क्या कुछ कहना है आप भी सुनिए...