नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर शहर में घोषित ब्लैकआउट के बाद बुधवार की शाम पुलिस लाइन के परेड ग्राउंड में ऐसा नज़ारा देखने को मिला, जिसने कुछ पल के लिए लोगों की धड़कनें तेज़ कर दीं। शाम ठीक 6 बजे अचानक पूरा इलाका अंधेरे में डूब गया और तभी हवाई हमले की सूचना के साथ सायरन गूंज उठे। देखते ही देखते परेड ग्राउंड में बनी एक झोपड़ी और मकान में आग लगने का दृश्य सामने आया। धुएं का गुबार उठने लगा और अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई। हालांकि यह कोई वास्तविक हमला नहीं था, बल्कि आपातकालीन हालात और हवाई हमले से निपटने के लिए आयोजित मॉक ड्रिल थी। सायरन बजते ही पुलिस, सुरक्षा बल, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और बम डिस्पोजल स्क्वॉड पूरी मुस्तैदी के साथ मौके पर पहुंच गए। सबसे पहले फायर ब्रिगेड की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इसी दौरान घायल बने लोगों को तत्काल एंबुलेंस से अस्पताल भेजने का अभ्यास भी किया गया। ड्रिल के दौरान बम डिस्पोजल दस्ते ने इलाके को घेरकर संदिग्ध बम को निष्क्रिय करने की कार्रवाई की। बम निरोधक दस्ते की गतिविधि शुरू होते ही आसपास मौजूद सभी लोगों को जमीन पर लेटने के निर्देश दिए गए, ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचाव किया जा सके। मौके पर मौजूद डॉक्टरों की टीम ने घायलों को प्राथमिक उपचार दिया। पूरा घटनाक्रम इतना वास्तविक था कि कुछ देर के लिए यह किसी असली आपात स्थिति जैसा प्रतीत हुआ। इस मॉक ड्रिल की निगरानी जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी और पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय स्वयं मौके पर मौजूद रहकर करते रहे। अधिकारियों ने इस अभ्यास के माध्यम से यह परखा कि आपातकाल या हवाई हमले जैसी स्थिति में प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियां और स्वास्थ्य सेवाएं कितनी तेजी और आपसी समन्वय के साथ काम कर सकती हैं। प्रशासन के अनुसार यह अभ्यास आम जनता की सुरक्षा, जागरूकता और त्वरित बचाव व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया। ब्लैकआउट के बीच हुई यह मॉक ड्रिल भविष्य में किसी भी आपदा या आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारियों का स्पष्ट संदेश देती है।