राजधानी में यदि आप अपने बच्चों को स्कूल में पढ़ने के लिए किसी स्कूल वैन या बस से भेजना चाहते हैं तो मानक के अनुसार आपको वाहन बड़ी ही मुश्किल से मिलेंगे। ऊपर से चालकों के पास लाइसेंस है कि नहीं है इसका सत्यापन भी आसान नहीं है। शहर में कई ऐसे वाहन हैं जिनके चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है। अभिभावक भी कहते हैं कि स्कूली वाहनों पर भरोसा नहीं कर सकते हैं। इसलिए हम स्वयं बच्चों को स्कूल पहुंचाने आते हैं और छुट्टी के समय उन्हें ले भी जाते हैं। इस संबंध में अमर उजाला के कैमरे पर आशियाना की रहने वाली अभिभावक चांदनी और आलमबाग के रहने वाले अभिभावक अविनाश ने साझा की अपनी बात।