बिहार SIR को लेकर 30 सितंबर को अंतिम सूची के प्रकाशन की तैयारी में चुनाव अधिकारी जहाँ फॉर्मों की जाँच कर रहे हैं और दावों व आपत्तियों पर पूछताछ कर रहे हैं, वहीं सर्वोच्च न्यायालय विपक्षी दलों और नागरिक समाज समूहों द्वारा दायर एसआईआर प्रक्रिया पर आपत्तियों पर सुनवाई कर रहा है, जिसकी अगली सुनवाई 12 अगस्त को निर्धारित है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में एक नया हलफनामा दायर किया है। ये हलफनामा बिहार में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ा है। आयोग ने शीर्ष अदालत को भरोसा दिलाया है कि वोटर लिस्ट से किसी का भी नाम बिना सूचना दिए और बिना आदेश के नहीं हटाया जाएगा। यह एफिडेविट एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की याचिका के जवाब में दिया गया है। याचिका में वोटर लिस्ट से हटाए गए लगभग 65 लाख नामों की जानकारी मांगी गई थी। चुनाव आयोग ने कहा है कि वो हर वोटर को शामिल करने के लिए पूरी कोशिश कर रहा है। साथ ही, अपील के लिए दो स्तर की व्यवस्था भी बनाई गई है। चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में कहा है कि पॉलिसी के तौर पर और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए, 1 अगस्त 2025 को प्रकाशित वोटर लिस्ट से किसी भी वोटर का नाम बिना पूर्व सूचना के नहीं हटाया जाएगा। मतदाता को नाम हटाने का कारण बताया जाएगा और उसे अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। सक्षम अधिकारी एक आदेश जारी करेंगे। इसका मतलब स्पष्ट है कि अब वोटर लिस्ट से नाम हटाने के पहले चुनाव आयोग को मतदाता को नोटिस देना होगा।