रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा अपने निर्धारित कार्यक्रमों और राजनयिक महत्व के साथ संपन्न हो गया। दौरे के अंतिम चरण में वे राष्ट्रपति भवन में आयोजित रात्रिभोज में शामिल हुए, जहाँ भारत-रूस मित्रता की ऐतिहासिक यात्रा और भविष्य की रणनीतिक साझेदारी पर खास जोर दिया गया। इस दौरान राष्ट्रपति पुतिन और भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने वक्तव्यों में दोनों देशों के बीच गहरे संबंधों की मजबूती और स्थिरता को रेखांकित किया।
राष्ट्रपति पुतिन ने अपने संबोधन में भारत-रूस संबंधों को ‘एक साथ चलो, एक साथ बढ़ो’ की सोच का प्रतीक बताया। उनका कहना था कि यह नारा केवल शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि दशकों से चले आ रहे विश्वास, साझेदारी और परस्पर सहयोग की वास्तविक तस्वीर है। पुतिन ने भारत की स्थिर विदेश नीति, वैश्विक मुद्दों पर उससे जुड़े संतुलित दृष्टिकोण और “दोस्ती निभाने की परंपरा” की दिल से प्रशंसा की।
पुतिन ने स्पष्ट कहा कि भारत और रूस वर्षों से एक-दूसरे के भरोसेमंद साथी रहे हैं। रक्षा, ऊर्जा, तकनीक, व्यापार सहित हर क्षेत्र में रूस भारत के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने इस यात्रा को अत्यंत फलदायी बताया और कहा कि लिए गए निर्णय दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं और नागरिकों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालेंगे। पुतिन ने भरोसा दिलाया कि रूस भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए “सब कुछ करेगा”।
रात्रिभोज की शुरुआत से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि यह अवसर विशेष है क्योंकि भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी शांति, स्थिरता और सामाजिक-आर्थिक प्रगति के साझा संकल्प पर आधारित है। मुर्मू ने वर्ष 2025 को भारत-रूस संबंधों के लिए अत्यंत सफल वर्ष बताया और 23वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के संयुक्त वक्तव्य को एक “व्यापक रोडमैप” करार दिया, जो दोनों देशों की गहराती साझेदारी का स्पष्ट संकेत है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक रिश्तों का भी उल्लेख किया रूसी यात्रियों की भारत यात्राओं से लेकर भारतीय व्यापारियों की रूस तक की आवाजाहट, महात्मा गांधी और लियो टॉल्स्टॉय के बीच हुए प्रेरक पत्र-विनिमय तक। उन्होंने कहा कि गंगा और वोल्गा की सांस्कृतिक धारा दोनों देशों की मित्रता का मार्गदर्शन करती रही है और करती रहेगी। रात्रिभोज को उन्होंने “दोस्ती का उत्सव” बताया।
रात्रिभोज के मेन्यू में भारत की विविधता का स्वाद भी परोसा गया। मुख्य आकर्षण रहा कश्मीर की मशहूर भरवां गुच्छी गुच्ची दून चेटिन, जिसे अखरोट की कश्मीरी चटनी के साथ परोसा गया। इसके साथ अचारी बैंगन, येलो दाल तड़का, सूखे मेवों और केसर वाला सुगंधित पुलाव, लच्छा परांठा और मगज नान भी टेबल पर थे। मिठाइयों में बंगाल का गुड़ संदेश, दक्षिण भारत का मुरुक्कू, और ठंड को ध्यान में रखते हुए गर्मागर्म बादाम का हलवा पेश किया गया।
सांस्कृतिक सौहार्द, रणनीतिक सहयोग और व्यक्तिगत गर्मजोशी से भरी इस शाम ने भारत-रूस संबंधों को एक नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की।