पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भवानीपुर व नंदीग्राम से भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी ने कहा, "आज पूरा बंगाल राम नवमी मना रहा है लेकिन ममता बनर्जी भाषण दे रही हैं। ममता बनर्जी राम नवमी के कार्यक्रम में शामिल नहीं हुईं, वे भाषण दे रही हैं ओर वोट मांग रही हैं। ममता बनर्जी हिंदू धर्म, हिंदू संस्कृति के साथ नहीं हैं उन्होंने ये साबित कर दिया.उन्होंने आगे कहा, "मैंने कोई भविष्यवाणी नहीं की.इस बार हमें 177 से ज्यादा सीटें मिलेंगी। जिस तरह से जनता का समर्थन मिल रहा है, SIR की प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से मृत वोटर्स, फर्जी मतदाता और बांग्लादेशी घुसपैठिए निकल रहे हैं। 79 लाख वोटर्स डिलीट हुए हैं। इसलिए इस बार बंगाल में राष्ट्रवादी सरकार आएगी
सुवेंदु अधिकारी, जो पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं और भवानीपुर व नंदीग्राम से भाजपा के प्रमुख नेता के रूप में जाने जाते हैं, ने राम नवमी के अवसर पर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए एक तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि “आज पूरा बंगाल राम नवमी मना रहा है, लेकिन ममता बनर्जी भाषण दे रही हैं।” सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि जहां एक ओर राज्यभर में लोग श्रद्धा और उत्साह के साथ भगवान राम के जन्मोत्सव को मना रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री इस धार्मिक आयोजन से दूरी बनाए रखते हुए राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी राम नवमी के कार्यक्रमों में शामिल नहीं हुईं, बल्कि वे जनसभाएं कर रही हैं और वोट मांग रही हैं, जो दर्शाता है कि उनकी प्राथमिकताएं धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से अलग हैं। सुवेंदु अधिकारी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में राम नवमी का त्योहार बड़े पैमाने पर मनाया जा रहा है, जिसमें शोभायात्राएं, पूजा-अर्चना और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। भाजपा नेता ने यह भी संकेत दिया कि राज्य सरकार की नीतियां और रवैया अक्सर हिंदू त्योहारों के प्रति उदासीन रहा है, और उन्होंने इसे जनता के बीच एक बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश की। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया कि मुख्यमंत्री सभी समुदायों के लोगों के लिए काम करती हैं और उनका ध्यान राज्य के विकास और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने पर केंद्रित है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए दिए जा रहे हैं, जहां धार्मिक मुद्दों के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। कुल मिलाकर, सुवेंदु अधिकारी का यह बयान पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी तीखी बयानबाजी और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है, जहां धार्मिक आयोजनों और राजनीतिक गतिविधियों के बीच संतुलन को लेकर लगातार बहस जारी है।