वक्फ कानून 2025 पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है.वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कानून पर रोक नहीं लगाई जा सकती। कानून पर केवल दुर्लभतम मामलों में ही रोक लगाई जा सकती है। हमने माना है कि अनुमान हमेशा कानून की सांविधानिकता के पक्ष में होता है। हालांकि कोर्ट ने कानून से जुड़े कुछ अहम प्रावधानों पर रोक लगा दी है। हालांकि, कोर्ट ने ये भी कहा कि कुछ धाराओं में सुरक्षा की जरूरत थी. उसी पर आगे की सुनवाई किया है, जिसमें वक्फ बोर्ड का मुख्य कार्यकारी अधिकारी कोई गैर मुस्लिम नहीं होने की सलाह दी गई है. साथ ही वक्फ की संपत्ति पर कलेक्टर के अधिकार पर कोर्ट ने टिप्पणी की है सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कलेक्टर को व्यक्तिगत नागरिकों के अधिकारों का निर्णय करने की अनुमति नहीं दी जा सकती. यह सेपरेशन ऑफ पावर्स के सिद्धांत का उल्लंघन होगा इस बीच इमरान प्रतापगढ़ी का बयान सामने आया है। बता दे की वक्फ कानून की संवैधानिकता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वालों में कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी भी थे. इनके अलावा डीएमके, एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी, कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलमा-ए-हिंद ने इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
22 मई को सुरक्षित रख लिया था फैसला
सभी मुद्दे वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान उठे थे। चीफ जस्टिस (सीजेआई) बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने 22 मई को इन तीनों पर दोनों पक्षों की दलीलों को सुना था, जिसके बाद अंतरिम अंतरिम आदेश सुरक्षित रख लिया गया था।
पांच अप्रैल को राष्ट्रपति ने दी थी मंजूरी
केंद्र सरकार ने आठ अप्रैल को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को अधिसूचित किया था। इससे पहले पांच अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस अधिनियम को मंजूरी दी थी। लोकसभा और राज्यसभा ने क्रमशः तीन और चार अप्रैल को वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को पारित किया था।