उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, "भारी बारिश से बहुत नुकसान हुआ है। जान-माल का नुकसान भी हुआ है. कल रात जैसे ही इस आपदा की जानकारी मिली, सभी विभाग काम पर लग गए। SDRF, NDRF, हमारे अन्य विभाग, जिला प्रशासन के अधिकारी सभी मौके पर गए. निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया.लगभग 80 प्रतिशत बिजली बहाल कर दी गई है। शेष 15%-20% एक-दो दिन में बहाल हो जाएगी. पूरा प्रशासन, पूरी मशीनरी और पूरा सिस्टम बचाव और राहत कार्य में पूरी तरह से लगा हुआ है। मैं प्रधानमंत्री जी का धन्यवाद करता हूं, उन्होंने हमें हर संभव आश्वासन दिया... केंद्रीय गृह मंत्री ने भी पूरी आपदा की जानकारी ली है और केंद्र सरकार लगातार हमारे साथ खड़ी है। हम अपने आपदा प्रभावित लोगों को हर संभव मदद प्रदान करने और स्थिति को संभालने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं
मॉनसूनी बारिश के कारण उत्तराखंड में जबरदस्त तबाही देखने को मिल रही है. साथ ही यह स्थानीय लोगों पर भी कहर बनकर के टूट रहा है. उत्तराखंड में आपदा के कारण 15 लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें से सर्वाधिक मौतें देहरादून में हुई है. देहरादून में अलग-अलग जगहों पर आई आपदा के कारण अब तक 13 लोगों के मौत हो गई है. वहीं 15 से ज्यादा लोग लापता हैं और कई घायल हुए हैं. इसके अलावा नैनीताल और उधम सिंह नगर में एक-एक लोगों की मौत हुई है. देहरादून में अब तक 400 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया है. यहां पर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की संयुक्त टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं. देहरादून के प्रेम नगर क्षेत्र में सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं.
यहां की आसन नदी में करीब 15 मजदूर बह गए. एसडीआरएफ ने आठ शवों को बरामद किया है. दो लोगों को एसडीआरएफ ने बचाया है और पांच अभी भी लापता हैं. इस हादसे में जानकारी के मुताबिक यह सभी लोग नदी में खनन करने के लिए गए थे, लेकिन नदी में पानी ज्यादा आने की वजह से यह सभी लोग बह गए. बता दें कि उत्तराखंड के पहाड़ों की गोद में बसा शांत मालदेवता और सहस्त्रधारा अचानक कुदरत के कहर से चीख उठा. सहस्त्रधारा की वादियों में बारिश कहर बनकर बरस रही है. बादल फटा तो सिर्फ पानी नहीं बरसा बल्कि ऊपर से आफत भी बरसी. वहीं मालदेवता में सॉन्ग नदी भी अपने उफान पर है. नदी देहरादून मालदेवता और टिहरी जाने वाले रोड को बहाकर ले गई है. 10 से 15 साल में ऐसा पहली बार है जब सौंग नदी का इतना रौद्र रूप देखने को मिल रहा है. वहीं सहस्त्रधारा में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और लोक निर्माण विभाग की टीमें जेसीबी और अन्य आवश्यक उपकरणों के साथ राहत कार्य में जुटी हुई हैं.