रक्षा विशेषज्ञ जीडी बख्शी ने वैश्विक तेल बाजार को लेकर एक बड़ा और चिंताजनक बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। उनके अनुसार, मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियां, विशेष रूप से अमेरिका की नीतियां और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव, पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रहे हैं। बख्शी का मानना है कि इन हालातों के चलते तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका साबित होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की रणनीतियों और विभिन्न देशों पर लगाए गए प्रतिबंधों ने ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है, जिससे तेल उत्पादन और वितरण में असंतुलन पैदा हो गया है। खासतौर पर प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में जारी संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। बख्शी के मुताबिक, यदि यही स्थिति बनी रही तो इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा, क्योंकि पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी और महंगाई में तेज इजाफा होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इतनी ऊंचाई तक पहुंचती हैं, तो परिवहन, बिजली उत्पादन और कई अन्य उद्योगों की लागत बढ़ जाएगी, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता आ सकती है। भारत जैसे देशों के लिए, जो बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं, यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण होगी। ऐसे में सरकारों को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर जोर देने और आर्थिक नीतियों में बदलाव करने की आवश्यकता पड़ सकती है।
हालांकि, कुछ अर्थशास्त्री इस तरह के पूर्वानुमानों को अत्यधिक आक्रामक मानते हैं और कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार कई कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें मांग-आपूर्ति, ओपेक देशों के फैसले और वैश्विक आर्थिक स्थिति शामिल हैं। फिर भी, जीडी बख्शी के इस बयान ने तेल की कीमतों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है और आने वाले समय में इस पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।