भोपाल में उस समय माहौल बेहद गमगीन और भावुक हो गया जब त्विषा का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए All India Institute of Medical Sciences Bhopal से भदभदा विश्राम घाट ले जाया गया। परिवार, रिश्तेदारों और परिचितों की आंखें नम थीं और हर कोई इस दुखद क्षण को भारी मन से देख रहा था। अंतिम यात्रा शुरू होने से पहले घर और अस्पताल परिसर के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। सभी लोग त्विषा को अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। जैसे ही पार्थिव शरीर को एम्बुलेंस से बाहर लाया गया, वहां मौजूद लोगों का दुख और अधिक गहरा हो गया। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था। सबसे अधिक भावुक दृश्य उस समय देखने को मिला जब अर्थी सजाने की तैयारी चल रही थी और त्विषा की मां अपनी बेटी को याद कर फूट-फूटकर रो पड़ीं। मां की चीख-पुकार सुनकर वहां मौजूद कई लोगों की आंखें भी भर आईं। परिवार की महिलाओं ने उन्हें संभालने की कोशिश की, लेकिन एक मां के दर्द को शब्दों में बयान करना मुश्किल था।
त्विषा के भाई Major Harshit Sharma ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि शाम करीब 5 बजे भदभदा श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया। उन्होंने कहा कि परिवार इस गहरे दुख की घड़ी से गुजर रहा है और सभी लोग अभी भी इस सदमे को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने नम आंखों से त्विषा को श्रद्धांजलि दी। कई लोग “ॐ शांति” और “अमर रहे” जैसे शब्दों के साथ उन्हें अंतिम विदाई देते नजर आए। वातावरण में शोक और संवेदनाओं का भारी असर साफ महसूस किया जा सकता था।
भदभदा विश्राम घाट पहुंचने के बाद पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। परिवार के करीबी सदस्य और मित्र लगातार एक-दूसरे को ढांढस बंधाते रहे। इस दौरान हर किसी के चेहरे पर गहरा दुख दिखाई दे रहा था। अंतिम संस्कार के समय मौजूद लोगों ने ईश्वर से त्विषा की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और परिवार को इस कठिन समय में शक्ति देने की कामना की। पूरे घटनाक्रम ने वहां उपस्थित हर व्यक्ति को भावुक कर दिया और माहौल लंबे समय तक शोक में डूबा रहा।