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TMC Split News: TMC में बगावत पर मंत्री उमेश राय के इस बड़े दावे से गरमाई बंगाल की राजनीति

वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Updated Tue, 16 Jun 2026 04:30 AM IST


पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को लेकर एक बार फिर तीखी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली है। राज्य सरकार में मंत्री उमेश राय ने टीएमसी और उसकी प्रमुख ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए दावा किया कि पार्टी अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने वर्षों पहले कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था और आज वही पार्टी आंतरिक असंतोष तथा नेताओं के पलायन की समस्या का सामना कर रही है। उमेश राय के अनुसार, जो राजनीतिक दल दूसरों के संगठन को कमजोर करके आगे बढ़ते हैं, उन्हें एक दिन उसी तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।

मंत्री ने अपने बयान में कहा कि ममता बनर्जी ने कांग्रेस को तोड़कर अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई थी, लेकिन अब उनकी नीतियों और नेतृत्व शैली से असंतुष्ट होकर कई नेता और विधायक उनसे दूरी बना रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता नेतृत्व से खुश नहीं हैं। राय ने यह भी कहा कि कुछ सांसद पहले ही अलग रास्ता चुन चुके हैं और नए राजनीतिक विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। उनके अनुसार, जो विधायक अभी टीएमसी के साथ दिखाई दे रहे हैं, वे भी लंबे समय तक पार्टी में बने नहीं रहेंगे।

उमेश राय ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस का जनाधार कमजोर हो रहा है और जनता के बीच पार्टी की स्वीकार्यता पहले जैसी नहीं रही। उन्होंने कहा कि राज्य में लोगों के बीच सरकार की कार्यशैली को लेकर सवाल उठ रहे हैं और इसका असर पार्टी के संगठन पर भी दिखाई दे रहा है। राय के अनुसार, यही कारण है कि टीएमसी के भीतर लगातार राजनीतिक हलचल बनी हुई है और कई नेता भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं को देखते हुए दूसरे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह बयान एक राजनीतिक नेता की राय और आरोप हैं। टीएमसी की ओर से समय-समय पर ऐसे दावों को खारिज किया जाता रहा है और पार्टी नेतृत्व का कहना रहा है कि संगठन मजबूत है तथा जनता का समर्थन उसके साथ बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी राजनीति में इस प्रकार के आरोप-प्रत्यारोप आम बात हैं और किसी भी दल के भविष्य का आकलन अंततः जनता के जनादेश और चुनावी परिणामों से ही होता है।

फिलहाल, उमेश राय के इस बयान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर विपक्ष टीएमसी के भविष्य पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ दल अपने संगठन और नेतृत्व को मजबूत बताने में जुटा हुआ है। आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक परिस्थितियां और चुनावी घटनाक्रम ही तय करेंगे कि इन दावों में कितनी सच्चाई है।

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