देशभर में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और लगातार सामने आ रही डॉग बाइट की घटनाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और बेहद सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि इंसानी जीवन की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है और अगर कोई कुत्ता रेबीज से संक्रमित है या गंभीर बीमारी की वजह से लोगों के लिए खतरा बन चुका है, तो उसे मारने की अनुमति दी जा सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि वह जमीनी सच्चाई से आंखें बंद नहीं कर सकती, क्योंकि देश के अलग-अलग हिस्सों से बच्चों, बुजुर्गों और आम लोगों पर कुत्तों के हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर अपने पहले दिए गए आदेशों में बदलाव करने से इनकार कर दिया। अदालत ने उन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया जिनमें 7 नवंबर 2025 के आदेश को वापस लेने या उसमें नरमी बरतने की मांग की गई थी।