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Shivsena Foundation Day: पार्टी में फूट के बाद भावुक हुए उद्धव , शिंदे गुट ने साधा निशाना!

Sat, 20 Jun 2026 06:30 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

शिवसेना के स्थापना दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई। इस मौके पर शिवसेना नेता संजय निरुपम ने उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोलते हुए उनकी नेतृत्व क्षमता और पार्टी संचालन के तरीके पर सवाल उठाए। निरुपम ने उद्धव ठाकरे द्वारा पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए की गई भावनात्मक अपील को महत्वहीन बताते हुए कहा कि जब पार्टी का जनाधार और संगठन लगातार कमजोर हो रहा हो, तब केवल अध्यक्ष पद पर बने रहने का कोई विशेष महत्व नहीं रह जाता। उन्होंने दावा किया कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में पार्टी लगातार सिमटती जा रही है और इसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी स्वयं उद्धव ठाकरे की है। संजय निरुपम के अनुसार, पार्टी के भीतर संवादहीनता और संगठन से दूरी ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) को कमजोर करने में बड़ी भूमिका निभाई है। 

उन्होंने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे लंबे समय से अपने निवास ‘मातोश्री’ तक सीमित होकर रह गए हैं और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं तथा जनता के बीच उनकी सक्रियता बहुत कम हो गई है। निरुपम ने कहा कि एक सफल राजनीतिक दल के लिए नेतृत्व का लगातार कार्यकर्ताओं, सांसदों, विधायकों और संगठन के अन्य पदाधिकारियों से संपर्क में रहना बेहद जरूरी होता है, लेकिन उद्धव ठाकरे इस मामले में विफल रहे हैं। यही कारण है कि पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता उनका साथ छोड़कर दूसरे गुटों में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि बड़ी संख्या में लोग उद्धव ठाकरे के नेतृत्व से निराश होकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो रहे हैं। निरुपम के अनुसार, एकनाथ शिंदे लगातार कार्यकर्ताओं और नेताओं के संपर्क में रहते हैं तथा संगठन को मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं, जिसके कारण उन्हें व्यापक समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना आगे बढ़ रही है और संगठन का विस्तार हो रहा है, जबकि उद्धव ठाकरे का गुट लगातार कमजोर पड़ता जा रहा है। गौरतलब है कि वर्ष 2022 में शिवसेना में हुए बड़े राजनीतिक विभाजन के बाद से उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट के बीच वर्चस्व की लड़ाई जारी है। दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर पार्टी की मूल विचारधारा से भटकने और संगठन को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाते रहे हैं। स्थापना दिवस के अवसर पर संजय निरुपम का यह बयान इसी राजनीतिक संघर्ष की एक और कड़ी माना जा रहा है, जिसने महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

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