यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने देश और युद्ध के प्रति प्रतिबद्धता की बात करते हुए एक बार फिर से दुनिया का ध्यान यूक्रेन पर केंद्रित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि, इस कठिन और चुनौतीपूर्ण समय में उनका प्राथमिक उद्देश्य अपने देश के साथ खड़ा होना और उसे युद्ध की विभीषिका से बाहर निकालना है। "मैं इस कठिन समय में अपने देश के साथ रहना चाहता था, अपने देश की मदद करना चाहता था," जेलेंस्की ने कहा। उनके शब्दों में एक दृढ़ संकल्प और अपने देश के प्रति गहरी प्रतिबद्धता झलक रही थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका अंतिम लक्ष्य युद्ध को समाप्त करना है और अगर ऐसा संभव हुआ, तो वे यूक्रेन की संसद से आग्रह करेंगे कि राष्ट्रपति चुनाव जल्द से जल्द आयोजित किए जाएं।तो सवाल है कि क्या यूक्रेन में होने वाला है तख्तापलट ? क्या जेलेंस्की जल्द दे सकते हैं इस्तीफा ?
यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2024 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को मार्शल लॉ के तहत स्थगित कर दिया गया था। यह मार्शल लॉ फरवरी 2022 में रूस के पूर्ण आक्रमण के बाद लागू किया गया था। उस समय यूक्रेन ने न केवल अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए तैयारी करनी शुरू की थी, बल्कि पूरे देश को युद्ध की विभीषिका में ढकेलने वाले संकट का सामना करना पड़ा था। पूर्व हास्य कलाकार जेलेंस्की, जिन्हें 2019 में राष्ट्रपति के रूप में चुना गया था, ने इस कठिन समय में अपनी नेतृत्व क्षमता साबित की है। युद्ध की साढ़े तीन साल से अधिक लंबी अवधि के बावजूद, जनता ने उनके प्रति भरोसा बनाए रखा और उन्हें यूक्रेन के संघर्ष में मार्गदर्शन करने का अधिकार दिया।
जेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्च स्तरीय बैठक में विश्व नेताओं को संबोधित करते हुए चेताया कि वर्तमान समय मानव इतिहास की सबसे विनाशकारी शस्त्र दौड़ का दौर है। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस शस्त्र दौड़ और रूस के आक्रमण को रोकने में पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। "दुनिया में मानव इतिहास की सबसे विनाशकारी शस्त्र दौड़ चल रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को रूस के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए," उन्होंने कहा। जेलेंस्की ने विशेष रूप से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पुतिन का इरादा यूरोप में अपने युद्ध को और फैलाने का है, जिससे पूरे महाद्वीप में सुरक्षा और स्थिरता पर खतरा मंडराने लगा है।जेलेंस्की ने यह भी स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की कमजोरियों ने युद्धों को रोकने में विफलता दिखाई है। उनके अनुसार, यूक्रेन, गाजा और सूडान जैसी जगहों पर संघर्ष लगातार जारी है, और अंतरराष्ट्रीय कानून पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया को अब ठोस और निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है, न कि केवल घोषणाओं और प्रतीकात्मक बैठकों तक सीमित रहने की।