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Rupee All-Time Low: डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड गिरा रुपया,विपक्षी नेताओं ने सरकार पर दागे तीखे सवाल!

Mon, 23 Mar 2026 04:00 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया हाल ही में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और राजनीतिक माहौल दोनों में हलचल तेज़ हो गई है। रुपये की इस गिरावट को लेकर विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं और आर्थिक प्रबंधन पर गंभीर चिंताएं जताई हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों द्वारा पूंजी निकासी जैसे कारणों से रुपये पर दबाव बना हुआ है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव ने भी स्थिति को और जटिल बना दिया है।

विपक्ष के प्रमुख नेताओं, जिनमें राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल हैं, ने आरोप लगाया है कि सरकार की नीतियां रुपये को स्थिर रखने में विफल रही हैं। उनका कहना है कि लगातार गिरता रुपया महंगाई को बढ़ावा देता है, जिससे आम जनता पर सीधा असर पड़ता है, खासकर पेट्रोल-डीजल, गैस और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि होती है। विपक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि जब सरकार मजबूत अर्थव्यवस्था का दावा करती है, तो फिर मुद्रा इतनी कमजोर क्यों हो रही है।

वहीं, केंद्र सरकार की ओर से जवाब दिया गया है कि रुपये की गिरावट केवल घरेलू कारणों से नहीं, बल्कि वैश्विक परिस्थितियों का परिणाम है। सरकार का कहना है कि दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई हैं और भारत की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। वित्त मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के प्रयास जारी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की कमजोरी का असर निर्यात और आयात दोनों पर पड़ता है। जहां एक ओर निर्यात को कुछ हद तक फायदा हो सकता है, वहीं आयात महंगा हो जाता है, जिससे व्यापार घाटा बढ़ सकता है। इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह स्पष्ट है कि रुपये की स्थिति आने वाले समय में भी एक बड़ा आर्थिक और राजनीतिक मुद्दा बनी रह सकती है, जिसका प्रभाव आम नागरिकों से लेकर उद्योग जगत तक महसूस किया जाएगा।

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