फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

MP Congress Rift: राज्यसभा विवाद के बीच सामने आई कांग्रेस की फूट! दिग्विजय-हरीश में दिखी तल्खी

Fri, 12 Jun 2026 07:29 PM IST
Adarsh Jha अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम

मध्य प्रदेश की राजनीति में मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द होना अब सिर्फ कानूनी विवाद नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर बढ़ती खींचतान की कहानी भी बनता जा रहा है। एक तरफ कांग्रेस भाजपा पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगा रही है और कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है, तो दूसरी तरफ पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसा घटनाक्रम देखने को मिला जिसने कई सवाल खड़े कर दिए। दिग्विजय सिंह की चुप्पी, मंच पर नेताओं के बीच दिखी असहजता और कांग्रेस विधायकों की खुली नाराजगी ने सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है। सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस के भीतर सब कुछ ठीक है या फिर अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आने लगी है?

मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव से जुड़ा विवाद अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है। एक तरफ कांग्रेस इस फैसले को लोकतंत्र पर हमला बता रही है, तो दूसरी तरफ पार्टी के भीतर भी असहजता और मतभेद खुलकर सामने आते दिखाई दे रहे हैं। नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस की ओर से बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो घटनाक्रम देखने को मिला, उसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने नामांकन रद्द किए जाने के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। पटवारी ने कहा कि भाजपा हर स्तर पर लोकतंत्र को कलंकित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों, जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसे आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस इस मामले को अदालत में चुनौती देगी। उनके मुताबिक, पार्टी कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा करती है।

हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा उस घटनाक्रम की रही, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बोलने से इनकार कर दिया। मंच पर मौजूद जीतू पटवारी और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने दिग्विजय सिंह से मीडिया को संबोधित करने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने माइक लेने से साफ मना कर दिया। दिग्विजय सिंह की यह चुप्पी तुरंत राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई और इसे कांग्रेस के भीतर बढ़ते असंतोष से जोड़कर देखा जाने लगा।

मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंच पर एक ऐसा दृश्य भी सामने आया, जिसने पार्टी के भीतर समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए। बताया जा रहा है कि दिग्विजय सिंह ने वरिष्ठ नेता जेपी धनोपिया को अपनी बात रखने का संकेत दिया था। इसी दौरान प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि वे इस स्थिति को संभाल लेंगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस टिप्पणी के बाद दिग्विजय सिंह कुछ असहज नजर आए और उन्होंने हाथ जोड़कर प्रतिक्रिया दी। दोनों नेताओं के बीच हुआ यह संवाद कैमरे में कैद हो गया और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक सामान्य मंचीय असहजता नहीं थी, बल्कि कांग्रेस संगठन के भीतर मौजूद तनाव की झलक भी हो सकती है। खासकर ऐसे समय में जब पार्टी पहले ही मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाने की कोशिश कर रही है।

इस विवाद को और हवा तब मिली जब भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय का बयान सामने आया। विजयवर्गीय ने दावा किया कि जिस दस्तावेज के आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज हुआ, वह कांग्रेस के ही लोगों द्वारा उपलब्ध कराया गया था। हालांकि, उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई सार्वजनिक प्रमाण पेश नहीं किया, लेकिन उनके इस बयान ने कांग्रेस के भीतर संभावित गुटबाजी की चर्चाओं को और तेज कर दिया। 

इसी बीच कांग्रेस विधायक रामकिशोर दोगने का बयान भी सुर्खियों में आ गया। दोगने ने खुले तौर पर पार्टी नेतृत्व पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कांग्रेस के बड़े नेताओं ने कार्यकर्ताओं और विधायकों का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर लड़ाई लड़ने वाले कार्यकर्ता और विधायक खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। दोगने ने दावा किया कि पिछले कुछ दिनों से जो घटनाक्रम सामने आ रहे हैं, वे स्वाभाविक नहीं बल्कि सुनियोजित प्रतीत होते हैं। उन्होंने संकेतों में कहा कि पूरी प्रक्रिया पहले से तय योजना के तहत संचालित हुई है।

अब इस पूरे विवाद ने कई राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला सवाल यह है कि क्या मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होना सिर्फ कानूनी और तकनीकी मामला है या इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक रणनीति भी है। दूसरा और ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या कांग्रेस के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिग्विजय सिंह की चुप्पी, मंच पर नेताओं के बीच दिखाई दी असहजता और पार्टी विधायकों की खुली नाराजगी ने इन सवालों को और मजबूत कर दिया है।

फिलहाल कांग्रेस इस मुद्दे को अदालत तक ले जाने की तैयारी कर रही है। लेकिन राजनीतिक रूप से यह विवाद सिर्फ नामांकन रद्द होने तक सीमित नहीं रह गया है। यह अब कांग्रेस संगठन की एकजुटता, नेतृत्व की कार्यशैली और पार्टी के भीतर मौजूद समीकरणों पर भी बहस का केंद्र बन चुका है। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला तो महत्वपूर्ण होगा ही, लेकिन उससे पहले कांग्रेस को अपने घर के भीतर उठ रहे सवालों का जवाब भी देना पड़ सकता है।

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें