अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित अनियमितताओं के आरोप अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए हैं। याचिका में इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच, एफआईआर दर्ज करने और सीबीआई जैसी एजेंसी से न्यायिक निगरानी में जांच कराने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता ने किसी व्यक्ति पर सीधे आरोप नहीं लगाए हैं, लेकिन कहा है कि मंदिर से जुड़ी आस्था को देखते हुए पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है। वहीं सवाल उठ रहा है कि जब बरामदगी और पूछताछ हो चुकी है तो अब तक एफआईआर क्यों नहीं दर्ज हुई।
अब तक लगभग 2.98 करोड़ रुपये की रिकवरी सामने आई है और कुछ लोगों की गिरफ्तारी व पूछताछ भी हुई है। गुप्त जांच में 8 करोड़ रुपये से अधिक की गड़बड़ी के संकेत मिले हैं, हालांकि अंतिम आंकड़ा जांच के बाद तय होगा।
मामले में यूपी सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है, जिसे 15 दिनों में रिपोर्ट देनी है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने एसआईटी गठन को तेज और सराहनीय कदम बताया है। साधु-संतों ने भी उम्मीद जताई है कि जांच से जल्द सच्चाई सामने आएगी और मंदिर की गरिमा बनी रहेगी।