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Rajasthan Cough Syrup Deaths: कप सिरप से हुई मौतों पर राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री ने बताया पूरा सच!

Thu, 09 Oct 2025 03:40 AM IST
भास्कर तिवारी वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम

राज्य में कथित तौर पर कफ सिरप से हुई मौतों पर राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खिमसर कहते हैं,"राजस्थान में पहली मौत की सूचना मिलते ही हमने तुरंत इस दवा पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह दवा 2012 से उपलब्ध है। अब तक इसके बारे में कोई शिकायत नहीं मिली थी। हमने दो अलग-अलग विभागों से नमूनों की जाँच करवाई है, लेकिन उनमें कोई समस्या नहीं पाई गई। दो मौतों के मामले में बच्चों को इंसेफेलाइटिस था। राजस्थान में कोई भी मौत गलत दवा लिखने से नहीं हुई है।" "हम जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल और उससे जुड़े अस्पतालों की सुरक्षा सीआईएसएफ को सौंप रहे हैं। पहले चरण में हम इसे सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों और बाद में राज्य के सभी अस्पतालों को सौंपेंगे ताकि वहाँ सुरक्षा व्यवस्था को और मज़बूत किया जा सके। उन्होंने दावा किया कि जिस कफ सिरप पर सवाल उठाए जा रहे थे, उसकी पूरी जांच कराई गई है। जांच (दो या चार बार) में यह दवा सुरक्षित और मानक (standard) पाई गई है, और इसमें कोई भी घातक पदार्थ नहीं पाया गया है।यह जांच औषधि नियंत्रक और दवा खरीदने वाली कंपनी आरएमएसएल (RMSCL) ने संयुक्त रूप से कराई थी। मंत्री ने कहा कि यह दवा सरकारी अस्पताल के डॉक्टर द्वारा लिखी या परामर्शित नहीं की गई थी। उन्होंने मौतों के लिए परिजनों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यह दवा बच्चों को उनके माता-पिता ने बिना डॉक्टरी सलाह के कहीं से भी खरीदकर दी थी।उन्होंने तर्क दिया कि वयस्कों के लिए निर्धारित दवा अगर बच्चों को दी जाएगी, तो हानिकारक प्रभाव होंगे। उन्होंने कहा कि विभाग की इसमें कोई भूमिका नहीं है। विवाद उठने के बाद, सरकार ने तुरंत प्रभाव से विवादित सिरप का वितरण रोक दिया था (जांच रिपोर्ट आने से पहले ही)।सिरप बनाने वाली कंपनी केसन्स फार्मा (Kaysons Pharma) की सभी 19 प्रकार की अन्य दवाओं की आपूर्ति पर भी रोक लगा दी गई है। मंत्री ने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और आगे भी सैंपलिंग कराई जा रही है, तथा जांच के बाद अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि बच्चों की मौत कफ सिरप से नहीं, बल्कि अन्य बीमारियों (को-मॉर्बिडिटी) के कारण हुई। उन्होंने दवा को सुरक्षित बताते हुए कहा कि यह विभाग द्वारा नहीं दी गई थी, बल्कि माता-पिता द्वारा बिना प्रिस्क्रिप्शन के दिए जाने से हादसा हुआ। हालांकि, विवादित कंपनी की दवाओं पर एहतियातन प्रतिबंध लगा दिया गया है।

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