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Rahul Gandhi vs Ravneet Singh Bittu: कांग्रेस के सिख सांसदों ने राहुल- रवनीत विवाद पर क्या बोला?

वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Updated Thu, 05 Feb 2026 05:00 AM IST

राहुल गांधी और रवनीत सिंह बिट्टू के बीच चल रहे राजनीतिक विवाद पर कांग्रेस के सिख सांसदों की प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसने इस पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। कांग्रेस के सिख सांसदों ने साफ शब्दों में कहा है कि यह विवाद किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि पार्टी की विचारधारा, इतिहास और मूल्यों से जुड़ा हुआ है। सांसदों का कहना है कि राहुल गांधी ने हमेशा देश की एकता, सामाजिक सद्भाव और सभी समुदायों के सम्मान की बात की है, जबकि रवनीत बिट्टू द्वारा दिए गए बयानों से न केवल पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा है, बल्कि सिख समुदाय की भावनाओं को भी ठेस पहुंची है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने हमेशा सिख समाज के अधिकारों और सम्मान के लिए संघर्ष किया है, चाहे वह 1984 के बाद का कठिन दौर हो या आज का समय, और ऐसे में पार्टी के भीतर रहकर इस तरह के बयान देना दुर्भाग्यपूर्ण है। सिख सांसदों ने जोर देकर कहा कि आंतरिक मतभेदों को सार्वजनिक मंचों पर उछालना पार्टी की एकजुटता को कमजोर करता है और विरोधियों को राजनीतिक फायदा पहुंचाता है।


उनका मानना है कि अगर किसी नेता को कोई असहमति है तो उसे पार्टी फोरम के भीतर लोकतांत्रिक तरीके से रखा जाना चाहिए, न कि मीडिया या सार्वजनिक बयानों के जरिए विवाद को बढ़ाया जाए। सांसदों ने राहुल गांधी के नेतृत्व का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा से लेकर संसद के भीतर तक सभी वर्गों की आवाज उठाई है और सिख समुदाय के मुद्दों को भी गंभीरता से रखा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस एक ऐसी पार्टी है, जहां संवाद और असहमति की गुंजाइश हमेशा रही है, लेकिन मर्यादा और अनुशासन भी उतना ही जरूरी है। सिख सांसदों ने उम्मीद जताई कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद को जल्द सुलझाएगा और सभी नेता मिलकर आने वाले चुनावों और जनहित के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। साथ ही उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि कांग्रेस की ताकत उसकी विविधता और सामूहिक नेतृत्व में है, न कि व्यक्तिगत बयानबाजी में। इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक विश्लेषक कांग्रेस के अंदर चल रही नेतृत्व और दिशा को लेकर बहस से भी जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन सिख सांसदों की यह प्रतिक्रिया साफ संकेत देती है कि पार्टी के भीतर राहुल गांधी को लेकर समर्थन अभी भी मजबूत है और किसी भी तरह के विवाद से ऊपर उठकर संगठन को एकजुट रखने की कोशिश जारी है।

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