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Rahul Gandhi in Prayagraj:राहुल के 'भारतीय डिग्रियों' वाले बयान पर बवाल, भाजपा ने किया पलटवार!

Mon, 10 Aug 2026 03:30 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भारतीय डिग्रियों की अहमियत को लेकर दिए गए बयान पर बीजेपी नेता गौरव वल्लभ ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। गौरव वल्लभ ने राहुल गांधी को नसीहत देते हुए कहा कि यह कहना कि डिग्रियां बेकार हैं या देश में कोई व्यवस्था नहीं है, राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेता को शोभा नहीं देता। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान युवाओं और शिक्षा व्यवस्था के प्रति नकारात्मक संदेश देते हैं और समाज में अराजकता की स्थिति पैदा करने की कोशिश के रूप में देखे जा सकते हैं। गौरव वल्लभ ने कहा कि भारतीय डिग्रियों की अपनी महत्वपूर्ण पहचान और उपयोगिता है तथा देश की बड़ी-बड़ी कंपनियां भारतीय शिक्षण संस्थानों से मिलने वाली डिग्रियों और प्रतिभाओं की अहमियत को स्वीकार करती हैं। 

उनके मुताबिक, लाखों छात्र वर्षों की मेहनत, पढ़ाई और प्रशिक्षण के बाद डिग्री हासिल करते हैं और इसी शिक्षा के आधार पर अपने करियर का निर्माण करते हैं। ऐसे में डिग्रियों को लेकर कोई व्यापक नकारात्मक टिप्पणी उन सभी छात्रों और डिग्रीधारकों की मेहनत को कमतर आंकने वाली हो सकती है। बीजेपी नेता ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे बयानों से देश के उन युवाओं का अपमान होता है जिन्होंने कठिन परिश्रम करके अपनी शिक्षा पूरी की है और रोजगार तथा बेहतर भविष्य की तलाश में आगे बढ़ रहे हैं। गौरव वल्लभ ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी युवाओं के मुद्दों को अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि युवा देश की सबसे महत्वपूर्ण ताकतों में से एक हैं और उनके भविष्य, शिक्षा तथा रोजगार से जुड़े मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय सकारात्मक और ठोस चर्चा होनी चाहिए।

उन्होंने विशेष रूप से Gen Z का जिक्र करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी जागरूक है और वह अपने मुद्दों को समझती है। गौरव वल्लभ का दावा है कि युवा किसी भी राजनीतिक एजेंडे को केवल भावनात्मक नारों के आधार पर स्वीकार नहीं करेंगे। उनके बयान के बाद भारतीय शिक्षा व्यवस्था, डिग्री की उपयोगिता, रोजगार और युवाओं के भविष्य को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि बदलते रोजगार बाजार में पारंपरिक डिग्री, कौशल और व्यावहारिक शिक्षा के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाए।

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