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PM Modi Lok Sabha Address Postponed:लोकसभा में क्यों टला पीएम मोदी का संबोधन?

अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Updated Wed, 04 Feb 2026 09:59 PM IST

लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा उस वक्त बड़े सियासी टकराव में बदल गई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रस्तावित जवाब भारी हंगामे के कारण टालना पड़ा। दिनभर चले विरोध, नारेबाजी और बार-बार स्थगन के बाद शाम को जब सदन दोबारा शुरू हुआ, तो हालात संभलने के बजाय और बिगड़ गए। नतीजा यह हुआ कि कार्यवाही फिर से स्थगित करनी पड़ी और प्रधानमंत्री का संबोधन हो ही नहीं सका।

दरअसल, पूरे दिन विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक चलती रही। विपक्ष का आरोप था कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सदन में पूर्व सेना प्रमुख की एक अप्रकाशित किताब का हवाला देने से रोका गया, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी सांसद लगातार विरोध प्रदर्शन करते रहे। दोपहर से ही सदन में नारेबाजी और शोर-शराबा जारी रहा, जिससे सामान्य कामकाज बार-बार बाधित हुआ।

शाम करीब पांच बजे जब कार्यवाही फिर से शुरू हुई, तब यह उम्मीद जताई जा रही थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी धन्यवाद प्रस्ताव पर अपना जवाब देंगे। लेकिन इसी दौरान विपक्ष की कुछ महिला सांसद ट्रेजरी बेंच के पास पहुंच गईं। भाजपा सांसद मनोज तिवारी के मुताबिक, इनमें वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि जैसी सांसद शामिल थीं, जिन्होंने “डू व्हॉट इज राइट” लिखा एक बड़ा बैनर पकड़ रखा था। यह विरोध एक दिन पहले निलंबित किए गए आठ विपक्षी सांसदों के समर्थन में बताया गया। महिला सांसद प्रधानमंत्री की सीट के आसपास खड़े होकर नारेबाजी करने लगीं, जिससे सदन का माहौल और तनावपूर्ण हो गया।

इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह विरोध पहले से तय योजना के तहत किया गया था और हालात इतने बिगड़ गए थे कि स्थिति डराने वाली लग रही थी। उनका दावा है कि संसदीय कार्य मंत्री कंवल जीत सिंह ढिल्लों की तत्परता से ही हालात काबू में आए। वहीं, विपक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे लोकतांत्रिक विरोध बताया और कहा कि सरकार असहमति की आवाज से डर रही है।

इस बीच प्रधानमंत्री का संबोधन न होने पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि जैसा उन्होंने पहले कहा था, प्रधानमंत्री सदन में नहीं आएंगे क्योंकि वे सच्चाई का सामना नहीं करना चाहते। वीडियो में राहुल गांधी यह कहते दिखे कि अगर प्रधानमंत्री आते, तो वे उन्हें एक किताब भेंट करते और उस पर चर्चा की मांग करते।

सदन की कार्यवाही उस समय पीठासीन सभापति संध्या राय चला रही थीं। उन्होंने बार-बार सदस्यों से व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन ट्रेजरी बेंच के पास जारी विरोध के चलते हालात नहीं संभले। आखिरकार उन्हें कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। बाद में कई केंद्रीय मंत्रियों के हस्तक्षेप और समझाने के बाद महिला सांसद अपनी सीटों पर लौटीं, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। प्रधानमंत्री का संबोधन नहीं हो सका और दिन की कार्यवाही समाप्त कर दी गई।

अब धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा अगली बैठक में आगे बढ़ने की संभावना है, लेकिन इस हंगामे ने एक बार फिर संसद के भीतर बढ़ते राजनीतिक टकराव और संवाद की कमी को उजागर कर दिया है।
 

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