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Impeachment Motion Against CEC Gyanesh Kumar: CEC के खिलाफ महाभियोग की तैयारी में सीएम ममता?

अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Updated Wed, 04 Feb 2026 09:34 PM IST

चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की तैयारी? ममता के बाद अब किसने उठाई ये आवाज? क्या ममता को मिला कांग्रेस-सपा का साथ? महाभियोग पर विपक्ष लेगा क्या फैसला?

पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट को लेकर उठा विवाद अब संवैधानिक टकराव की दहलीज पर खड़ा नजर आ रहा है। मामला अब सिर्फ मतदाता सूची में सुधार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की मांग तक पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस मांग को अब विपक्षी खेमे से लगातार समर्थन मिलने लगा है, जिससे केंद्र और चुनाव आयोग की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं।

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में सुधार के नाम पर तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के जरिए लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार छीने जा रहे हैं। इसी मुद्दे पर उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की मांग की थी।

अब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दल इस मांग पर खुलकर ममता के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने बुधवार को कहा कि इस मुद्दे पर पूरा विपक्ष मिलकर फैसला करेगा। उन्होंने ममता की पहल को “प्रासंगिक और गंभीर” बताते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने इस संबंध में कांग्रेस से संपर्क किया है और इस पर सकारात्मक रूप से विचार किया जा रहा है।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी के समर्थन में सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि ममता बीजेपी के “काले कारनामों” के खिलाफ लड़ रही हैं। अखिलेश ने कहा, “लोगों को आगे आना चाहिए। वोट छिनना मतलब अधिकार छिनना है। धीरे-धीरे सब कुछ खत्म हो जाएगा और एक दिन नागरिकता पर भी सवाल उठाए जाएंगे। हम ममता बनर्जी के साथ हैं।”
हालांकि, जब इस पूरे मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से सवाल किया गया, तो उन्होंने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को हर हाल में पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए। प्रियंका ने आरोप लगाया कि बीजेपी बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम हटाकर उनके अधिकारों का हनन कर रही है।
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी इसलिए यह लड़ाई लड़ रही हैं क्योंकि पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में उन लोगों के नाम हटाए गए हैं, जो परंपरागत रूप से तृणमूल कांग्रेस को वोट देते रहे हैं। प्रियंका ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाने के फैसले का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि इससे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता बनी रहेगी।

महाभियोग की मांग क्यों उठी?

इस पूरे विवाद की जड़ पश्चिम बंगाल में चल रहा मतदाता सूची सुधार का विशेष अभियान है। ममता बनर्जी लगातार इसका विरोध कर रही हैं। उनका आरोप है कि इस अभियान की आड़ में तृणमूल समर्थक वोटरों के नाम गलत तरीके से हटाए जा रहे हैं।
ममता इसी मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलने पहुंची थीं। उनका दावा है कि बैठक के दौरान CEC का रवैया अभिमानी था। नाराज ममता ने बैठक से वॉकआउट किया और इसके बाद सार्वजनिक रूप से CEC के खिलाफ महाभियोग लाने की मांग कर दी। उन्होंने अन्य विपक्षी दलों से भी इस मुद्दे पर समर्थन मांगा।

क्या है महाभियोग की संवैधानिक प्रक्रिया?

मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया बेहद कठिन और संवैधानिक रूप से सख्त है। यह प्रक्रिया लगभग सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने जैसी ही होती है। इसके लिए “साबित दुर्व्यवहार” या “अक्षमता” को आधार बनाना जरूरी होता है।
महाभियोग प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में लाया जा सकता है, लेकिन इसे पास कराने के लिए दोहरी शर्त होती है सदन के कुल सदस्यों के बहुमत का समर्थन और मौजूद व वोट देने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत की मंजूरी।

फिलहाल यह साफ है कि ममता बनर्जी की पहल ने विपक्ष को एक मंच पर लाने की कोशिश तेज कर दी है। सवाल यह है कि क्या विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट होकर संसद में महाभियोग की प्रक्रिया तक पहुंच पाएगा, या यह दबाव बनाने की एक सियासी रणनीति बनकर रह जाएगा। आने वाले दिनों में इस पर सियासी तापमान और बढ़ना तय माना जा रहा है।

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