एआईएमआईएम के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर अपने बयान से राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है। ओवैसी ने कहा है कि एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला देश की प्रधानमंत्री बनेगी। उन्होंने इसे अपना सपना बताते हुए सवाल किया कि क्या सपने देखना भी इस देश में गुनाह है। ओवैसी ने अपने बयान का विरोध करने वालों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जो लोग इस सोच से असहमत हैं, वे पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं।
अपने बयान पर सफाई देते हुए ओवैसी ने कहा कि क्या हिजाब पहनने वाली महिला के प्रधानमंत्री बनने का सपना देखना अपराध है? क्या देश का संविधान नागरिकों को सपने देखने और उन्हें पूरा करने से रोकता है? उन्होंने कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को समान अधिकार देता है और किसी भी धर्म को मानने वाला व्यक्ति देश का प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मेयर बन सकता है। ओवैसी ने दो टूक कहा कि अगर किसी को इससे परेशानी है, तो वह संविधान नहीं, बल्कि पाकिस्तान की सोच को आगे बढ़ा रहा है।
दरअसल, बीते दिनों महाराष्ट्र के सोलापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने यह बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि जिस तरह आज नफरत की राजनीति की जा रही है, वह ज्यादा दिन नहीं चलेगी और एक दिन हिजाब पहनने वाली बेटी भारत की प्रधानमंत्री बनेगी। उन्होंने पाकिस्तान और भारत के संविधानों की तुलना करते हुए कहा कि पाकिस्तान में सिर्फ एक धर्म के व्यक्ति के प्रधानमंत्री बनने का प्रावधान है, जबकि भारत का संविधान किसी भी भारतीय नागरिक को देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचने का अधिकार देता है।
ओवैसी के इस बयान पर महाराष्ट्र की सियासत गरमा गई। राज्य सरकार के मंत्री नितेश राणे ने पलटवार करते हुए कहा कि ओवैसी हिंदू राष्ट्र में इस तरह के बयान नहीं दे सकते। उन्होंने कहा कि जो लोग ऐसे पदों पर बैठना चाहते हैं, उन्हें इस्लामिक देशों में जाना चाहिए। राणे के बयान के बाद राजनीतिक टकराव और तेज हो गया।
वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस पूरे विवाद को खारिज करते हुए कहा कि इस तरह के बयानों की कोई जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, देश के सामने कई गंभीर मुद्दे हैं, जिन पर राजनीति और बहस होनी चाहिए, न कि ऐसे प्रतीकात्मक मुद्दों पर।