UGC ने Equity Regulations, 2026 जारी किए और देखते ही देखते देश के उच्च शिक्षण संस्थान एक अखाड़े में तब्दील हो गए। यूपी से लेकर राजस्थान तक, सवर्ण छात्र संगठन सड़कों पर हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुँच चुका है। लेकिन इस पूरे शोर-शराबे के बीच सबसे बड़ा धमाका किया है बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने। मायावती ने न केवल इन नियमों का खुलकर बचाव किया है, बल्कि विरोध करने वालों की मानसिकता पर ऐसा प्रहार किया है जिसकी गूँज सत्ता के गलियारों तक सुनाई दे रही है। ऐसे में मायावती ने क्या कहा है चलिए बताते है। विवाद को समझने के लिए पहले नियम को समझना जरूरी है। UGC के ये नए नियम कहते हैं कि हर यूनिवर्सिटी में एक 'इक्विटी कमेटी' होगी। इसका काम है कैंपस में SC, ST और पहली बार OBC छात्रों के साथ होने वाले किसी भी जातिगत भेदभाव, कमेंट या मानसिक उत्पीड़न को रोकना। 13 जनवरी को अधिसूचित किए नए इन नियमों का पहले सोशल मीडिया पर विरोध शुरू हुआ। देखते-देखते इसके विरोध में जगह-जगह प्रदर्शन होने लगे। मामला बढ़ते-बढ़ते सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। यहां इसे चुनौती दी गई है।
सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह विरोध अब 'सवर्ण समाज समन्वय समिति' के रूप में जयपुर की सड़कों पर दिख रहा है। विरोध करने वालों का तर्क है कि ये नियम एकतरफा हैं, इनका दुरुपयोग होगा और इसके जरिए सामान्य वर्ग के शिक्षकों और छात्रों को निशाना बनाया जाएगा। लेकिन क्या वाकई ये डर सही है या यह सिर्फ एक बदलाव का प्रतिरोध है? इसी मोड़ पर मायावती की एंट्री होती है। मायावती ने इस मामले में एंट्री मारते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी है. मायावती ने न सिर्फ इन नियमों का बचाव किया है, बल्कि सरकार की कार्यशैली और जाति की राजनीति करने वाले कुछ नेताओं पर भी तीखा हमला बोला