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'One Nation One Election':वन नेशन वन इलेक्शन पर गरमाई यूपी की राजनीति, पक्ष- विपक्ष में छिड़ी जंग!

Wed, 15 Jul 2026 03:30 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

'वन नेशन-वन इलेक्शन' (एक देश, एक चुनाव) के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। इस विषय पर केंद्र सरकार द्वारा लाए गए प्रस्ताव और उससे जुड़े विधेयक पर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मतभेद लगातार सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की बैठक के संदर्भ में मीडिया से बातचीत करते हुए इस प्रस्ताव पर अपनी पार्टी का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का मानना है कि 'एक देश, एक चुनाव' देश के हित में नहीं है। अजय राय ने कहा कि भारत की संघीय व्यवस्था संविधान की मूल भावना पर आधारित है और यही व्यवस्था देश को मजबूती प्रदान करती है। उनके अनुसार समय के साथ सुधार और बदलाव आवश्यक हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरी चुनावी व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि 'वन नेशन-वन इलेक्शन' के प्रस्ताव में कई कमियां हैं, जिन्हें दूर किए बिना इसे लागू करना उचित नहीं होगा। उनका कहना था कि इस व्यवस्था का राज्यों की स्वायत्तता, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और क्षेत्रीय मुद्दों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

वहीं, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने अजय राय के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि 'एक देश, एक चुनाव' व्यवस्था लागू होने से चुनावों पर होने वाला खर्च 80 से 90 प्रतिशत तक कम हो सकता है। उनके अनुसार बार-बार होने वाले चुनावों से सरकारी संसाधनों, प्रशासनिक मशीनरी और सुरक्षा बलों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है, जबकि एक साथ चुनाव होने से समय और धन दोनों की बचत होगी। गौरव वल्लभ ने यह भी कहा कि इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा सरकारें बार-बार चुनावी आचार संहिता के कारण विकास कार्यों में आने वाली बाधाओं से भी बच सकेंगी।

भाजपा नेता ने कांग्रेस पर राजनीतिक कारणों से इस प्रस्ताव का विरोध करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस को 'वन नेशन-वन इलेक्शन' से कोई वास्तविक आपत्ति है तो उसे स्पष्ट रूप से यह बताना चाहिए कि इसके विरोध से देश को क्या लाभ होगा। गौरव वल्लभ ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या कांग्रेस केवल इसलिए इस प्रस्ताव का विरोध कर रही है क्योंकि इसे भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार लेकर आई है। उनके अनुसार किसी भी नीति का मूल्यांकन उसके संभावित लाभ और चुनौतियों के आधार पर होना चाहिए, न कि उसे पेश करने वाली पार्टी के आधार पर।

इस तरह 'वन नेशन-वन इलेक्शन' का मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। एक ओर कांग्रेस इसे संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए इसकी कमियों पर चर्चा की मांग कर रही है, वहीं भाजपा इसे चुनावी सुधार, खर्च में कमी और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने वाला कदम बता रही है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर संसद और संयुक्त संसदीय समिति में होने वाली चर्चा के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच बहस और तेज होने की संभावना है।

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