फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

NEET Student Death Case: NEET छात्रा मौत मामले में सियासत गरमाई, क्या बोले चिराग-राजभूषण चौधरी?

वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Updated Mon, 09 Feb 2026 06:30 AM IST

बिहार में नीट छात्रा की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है एक तरफ जहां विरोधियों की ओर से सरकार पर हमला बोला जा रहा है वहीं सरकार इस पूरे मामले पर गहनता से जांच की बात कर रही है. NEET के एक छात्रा की हत्या के मामले पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा, "सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए हर कदम उठा रही है कि इस घटना के आरोपियों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिले ताकि ऐसी घटना दोबारा कभी न हो NEET के एक छात्रा की हत्या के मामले पर केंद्रीय मंत्री राजभूषण चौधरी निषाद ने कहा, "प्रशासन अपना काम कर रही है। सुशासन की सरकार है। कोई भी अपराधी नहीं बचेगा, न्याय होगा

नीट (NEET) की तैयारी कर रही एक छात्रा की मौत के मामले ने देशभर में गहरी संवेदना के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी तीखी बहस को जन्म दे दिया है। इस घटना को लेकर सियासत गरमा गई है और विभिन्न दलों के नेताओं ने इसे शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा दबाव और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से जोड़ते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसी कड़ी में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह (राजभूषण चौधरी के नाम से चर्चित) के बयान भी चर्चा में आ गए हैं, जिनमें दोनों ने अलग-अलग अंदाज़ में इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

चिराग पासवान ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक जताते हुए कहा कि नीट जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं का बढ़ता दबाव छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहा है। उन्होंने इसे केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा प्रणाली की विफलता करार दिया। चिराग ने मांग की कि सरकार और शिक्षा संस्थानों को मिलकर ऐसा माहौल बनाना होगा, जहाँ छात्रों पर नंबर और रैंक का असहनीय दबाव न हो। साथ ही उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और इस मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

वहीं भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भी छात्रा की मौत को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए संवेदना प्रकट की, लेकिन उन्होंने इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से बचने की सलाह दी। उनका कहना था कि छात्रों की मौत जैसे संवेदनशील मामलों पर राजनीति करने के बजाय ठोस समाधान खोजने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि कोचिंग संस्कृति, पारिवारिक अपेक्षाएं और सामाजिक दबाव—तीनों मिलकर छात्रों पर मानसिक बोझ बढ़ाते हैं, जिस पर गंभीर मंथन जरूरी है। साथ ही उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि छात्रों के लिए काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता को और मजबूत किया जाए।

इस पूरे मामले में जहां एक ओर विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है, वहीं सत्तापक्ष इसे एक सामाजिक समस्या मानते हुए साझा जिम्मेदारी की बात कर रहा है। नीट छात्रा की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या देश की शिक्षा व्यवस्था छात्रों को सफलता की दौड़ में इंसान बने रहने का अवसर दे पा रही है या नहीं। नेताओं के बयान चाहे अलग-अलग हों, लेकिन इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि परीक्षा प्रणाली और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर और ईमानदार संवाद अब टाला नहीं जा सकता।
 

Latest

विज्ञापन

Recommended

विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें