देश की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। संसद के भीतर संख्याबल का गणित तेजी से बदलता नजर आ रहा है और इसी वजह से भारतीय जनता पार्टी की नजर अब उन राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी है, जो विपक्षी दलों के भीतर चल रहे हैं। पश्चिम बंगाल से लेकर तमिलनाडु तक बदलती राजनीतिक परिस्थितियां केंद्र की राजनीति को नया मोड़ दे सकती हैं।
दरअसल, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती असहजता और संभावित राजनीतिक टूट की चर्चाओं ने दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि यदि राज्य स्तर पर शुरू हुआ असंतोष संसदीय दल तक पहुंचता है, तो संसद में विपक्ष की ताकत पर सीधा असर पड़ सकता है। भाजपा के रणनीतिकार इसी संभावना पर नजर बनाए हुए हैं और आने वाले महीनों के लिए अपनी राजनीतिक रणनीति तैयार कर रहे हैं।