उत्तर प्रदेश के तमाम छात्रों को मिड-डे-मील के नाम पर थाली में बासी भोजन परोसा जा रहा है। बासी भोजन के पीछे हर महीने आठ से 10 लाख रुपये तक का घोटाला हो रहा है। जानकारों का कहना है कि बासी भोजन से कभी मास फूड प्वाइजनिंग हादसा हो सकता है। क्योंकि, पौष्टिक की जगह पर हानिकारक भोजन परोसा जा रहा है। भोजन संबंधित विद्यालय से 10 किलीमोटर के अंदर रसोई में तैयार होना चाहिये वो 60 से 70 किलोमीटर की दूसरी से तैयार होकर आ रहा है। सोमवार व बृहस्पतिवार को शेड्यूल के हिसाब से भोजन में दी जाने वाली चपाती स्थानीय स्तर परसंचालित रसोई में नहीं बन रही हैं, बल्कि डासना व नोएडा में तैयार होती है। जहां से बच्चों की थाली तक पहुंचने में आठ से 10 घंटे तक का वक्त लग जाता है।