केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, "दशहरे और दीवाली के पहले प्रधानमंत्री ने देश के किसानों को दो बड़ी सौगातें दी हैं। भारत में कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान उसकी आत्मा. इन किसानों की आय बढ़े इसके लिए उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना और उत्पादन का ठीक दाम देने का फैसला मोदी सरकार का है और उत्पादन का ठीक दाम देने के लिए MSP पर खरीदी सुनिश्चित की गई है. रबी की 6 फसलों पर आज MSP घोषित की गई है. इसमें ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। गेहूं अब 2585 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा जाएगा जो पहले 2425 रुपये प्रति क्विंटल था। जौ, अब 2150 रुपया प्रति क्विंटल खरीदा जाएगा, अब तक इसके दाम 1980 थे। चना 8,575 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा जाएगा.मसूर पर MSP को 6700 से बढ़ाकर 7000 रुपये प्रति क्विंटल कर दी गई है.पिछले 11 साल में लगभग 44% खाद्यान उत्पादन बढ़ा है. हालांकि दलहन के उत्पादन में हम अभी तक आत्मनिर्भर नहीं हैं.आत्मनिर्भरता जरूरी है.इसलिए आज दलहन मिशन को भी स्वीकृति दी गई है जिसके अंतर्गत दलहन का क्षेत्र बढ़ाने का अभियान चलाया जाएगा.बल्कि क्षेत्र बढ़ाने के साथ-साथ हम दलहन की उत्पादकता बढ़ाने का भी काम करेंगे.
उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए उत्पादन बढ़ाने, लागत घटाने और उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए एमएसपी पर खरीदी सुनिश्चित की गई है। उन्होंने इस वृद्धि को ऐतिहासिक बताया। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने गेहूं, चना, मसूर, सरसों आदि के एमएसपी में हुई वृद्धि का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि गेहूं और धान तो सरकार पूरा खरीदेगी, लेकिन मसूर, तूर (अरहर) और उड़द की भी पूरी उत्पादित मात्रा खरीदी जाएगी, बशर्ते किसान पंजीकरण करवाएं, ताकि किसानों को उनकी उपज का ठीक दाम मिल सके।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 44% की वृद्धि हुई है, लेकिन देश अभी भी दाल उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं है। इसलिए, विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने और किसानों को दलहन की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के लिए दलहन मिशन को मंज़ूरी दी गई है। इस मिशन का लक्ष्य अगले 6 वर्षों (2030-31 तक) में दलहन का उत्पादन 242 लाख टन से बढ़ाकर 350 लाख टन करना है। इसके तहत 416 जिलों का चयन किया गया है, जहां क्लस्टर अप्रोच के आधार पर किसानों को निशुल्क उन्नत बीज और आधुनिक कृषि पद्धतियों की जानकारी दी जाएगी।