मंगलवार रात पटना एयरपोर्ट पर एक बड़ा विमान हादसा होते-होते टल गया। दिल्ली से आ रही इंडिगो एयरलाइंस की फ्लाइट 6E 2482 लैंडिंग के दौरान रनवे ओवरशूट कर गई। यानी विमान तय टचडाउन ज़ोन से आगे निकल गया और अनियंत्रित होने की स्थिति में पहुंच गया था। लेकिन पायलट की सूझबूझ और त्वरित निर्णय से 175 यात्रियों की जान बच गई।
इस घटना ने एक बार फिर पटना एयरपोर्ट के छोटे रनवे और विमान संचालन क्षमता पर सवाल खड़ा कर दिया है। इससे पहले भी ठीक 7 दिन पहले एक फ्लाइट पक्षी से टकराकर इमरजेंसी लैंडिंग के लिए मजबूर हो गई थी।
मंगलवार की रात करीब 9 बजे, दिल्ली से उड़ान भर चुकी इंडिगो फ्लाइट 6E 2482 पटना एयरपोर्ट पर लैंड करने वाली थी। मौसम सामान्य था और सभी यात्री लैंडिंग के लिए तैयार थे। लेकिन लैंडिंग के वक्त विमान रनवे के निर्धारित टचडाउन जोन को पार कर गया।
जब पायलट ने देखा कि विमान रनवे पर काफी आगे निकल चुका है और बचा हुआ रनवे विमान को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है, तो उन्होंने तुरंत निर्णय लिया और “गो-अराउंड” प्रक्रिया अपनाई। यानी विमान को दोबारा उड़ाकर, एक सुरक्षित ऊंचाई पर ले जाकर फिर से लैंडिंग की तैयारी की।
करीब 10 मिनट बाद, विमान ने दूसरी बार लैंडिंग की और इस बार प्रक्रिया पूरी तरह सफल रही।
रनवे ओवरशूट वह स्थिति होती है जब विमान रनवे के निर्धारित हिस्से पर लैंड नहीं कर पाता और इतना आगे निकल जाता है कि वह रुकने से पहले रनवे छोड़ देता है। इससे विमान के फिसलने, दुर्घटनाग्रस्त होने या जमीन से टकराने की संभावना बढ़ जाती है।
इसके कई कारण हो सकते हैं:
• विमान की गति अधिक होना
• टचडाउन पॉइंट मिस होना
• थ्रस्ट रिवर्सल या ब्रेकिंग सिस्टम में गड़बड़ी
• रनवे की लंबाई अपर्याप्त होना
• गीला या फिसलन भरा रनवे
पटना एयरपोर्ट का रनवे अपेक्षाकृत छोटा है और इसे लेकर पहले भी विमानन विशेषज्ञ चिंता जाहिर कर चुके हैं।
इस घटना के महज़ 7 दिन पहले, पटना से दिल्ली जा रही एक अन्य इंडिगो फ्लाइट से एक पक्षी टकरा गया था। उड़ान भरते ही विमान के इंजन में वाइब्रेशन शुरू हो गया, जिससे पायलट को तत्काल समस्या का आभास हुआ।
विमान में 175 यात्री सवार थे, और पायलट ने तुरंत ATC (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) से संपर्क कर इमरजेंसी लैंडिंग की अनुमति मांगी। विमान को सुरक्षित रूप से वापस पटना एयरपोर्ट पर लैंड करवा लिया गया।
ये लगातार दूसरी बड़ी घटना है, जिसने पटना एयरपोर्ट की सुरक्षा और विमान संचालन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
पटना एयरपोर्ट भारत के व्यस्ततम घरेलू एयरपोर्ट्स में एक है, लेकिन इसका रनवे मात्र 2286 मीटर लंबा है, जो बड़े विमानों के लिए सीमित माना जाता है। रनवे के दोनों सिरों पर आबादी और संरचनाएं होने के कारण विस्तार की संभावना भी सीमित है।
एविएशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, इतने छोटे रनवे पर भारी विमानों की लैंडिंग या टेकऑफ में बेहद सटीकता और अनुकूल परिस्थितियों की आवश्यकता होती है। जरा सी चूक या मौसम में बदलाव हादसे का कारण बन सकते हैं।
घटना के बाद विमान के यात्रियों ने राहत की सांस ली। कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर पायलट की तेज सूझबूझ की तारीफ करते हुए कहा कि यदि उन्होंने देरी की होती तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था।
इंडिगो एयरलाइंस की ओर से बयान जारी कर कहा गया है कि “पायलट ने SOP (Standard Operating Procedure) के तहत फैसला लिया और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।”
वहीं DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) ने घटना का संज्ञान लिया है और विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। पायलट की कार्रवाई को फिलहाल सही और समयानुकूल माना जा रहा है।
इन दो घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पटना एयरपोर्ट को अपग्रेड करने की जरूरत है। चाहे रनवे की लंबाई बढ़ाने की बात हो या आसपास के इलाके को साफ रखने की, यह वक्त है कि केवल पायलट की सूझबूझ पर न छोड़ा जाए।
175 यात्रियों की जान इस बार बच गई, लेकिन अगली बार क्या होगा, इसका उत्तर सिस्टम को देना होगा।