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Maharashtra Political Crisis: सचिन अहीर के पार्टी छोड़ने पर क्या बोले Aditya Thackeray?Shivsena (UBT)

Tue, 30 Jun 2026 07:03 PM IST
Adarsh Jha अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) के सामने चुनौतियां लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी के छह सांसदों की बगावत के बाद अब विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) सचिन अहीर के महायुति खेमे के साथ जाने से उद्धव ठाकरे गुट को एक और बड़ा झटका लगा है। हालांकि, शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने इसे पार्टी के लिए बड़ा नुकसान मानने से इनकार करते हुए कहा कि इससे संगठन की ताकत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने विपक्षी नेताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिशों को "ऑपरेशन टाइगर" नहीं, बल्कि "ऑपरेशन देवेंद्र फडणवीस" करार दिया।

आदित्य ठाकरे ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में शिवसेना (यूबीटी) केवल "कॉलेटरल डैमेज" यानी अतिरिक्त नुकसान का शिकार हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेताओं को लगातार तोड़ने की रणनीति अपनाई जा रही है। उनका कहना था कि जो लोग राजनीतिक घटनाक्रम को समझते हैं, वे जानते हैं कि यह किस तरह का अभियान है।

सचिन अहीर ने मंगलवार को महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के चुनाव के लिए सत्तारूढ़ शिवसेना की ओर से नामांकन दाखिल कर सभी को चौंका दिया। अहीर को लंबे समय से आदित्य ठाकरे का करीबी माना जाता रहा है। उनके इस कदम ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

अहीर के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि वर्ली और शिवड़ी जैसे क्षेत्र शिवसेना (यूबीटी) के मजबूत गढ़ रहे हैं और आगे भी बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि किसी एक नेता के जाने से पार्टी की जमीनी पकड़ कमजोर नहीं होगी। ठाकरे ने यह भी कहा कि पार्टी छोड़ने वाले कुछ नेता अपने निजी हितों को संगठन से ऊपर रखते हैं और यह राजनीति में कोई नई बात नहीं है।

आदित्य ठाकरे ने सचिन अहीर पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें हमेशा सम्मान और जिम्मेदारियां दीं। उन्होंने याद दिलाया कि अहीर को शिवसेना (यूबीटी) का उपनेता बनाया गया, एमएलसी का पद दिया गया, भारतीय कामगार सेना में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई और बेस्ट यूनियन का नेतृत्व भी उनके पास है। इसके अलावा उनकी बेटी के एनजीओ को वार्ड-स्तरीय समिति में जगह भी दी गई। ठाकरे ने सवाल उठाया कि आखिर पार्टी ने उन्हें और क्या नहीं दिया।

उन्होंने यह भी खुलासा किया कि कुछ दिन पहले पुणे से लौटते समय उनकी और अहीर की लंबी बातचीत हुई थी। उस दौरान उन्होंने राज्य में विभिन्न संस्थानों पर कथित दबाव और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा की थी। ऐसे में अहीर का अचानक लिया गया फैसला उनके लिए हैरान करने वाला है। ठाकरे ने सवाल उठाया कि जो नेता पहले मौजूदा सरकार की आलोचना करते थे, वे अब उसी खेमे के साथ कैसे बैठ सकते हैं।

वर्ली विधानसभा सीट को लेकर पूछे गए सवाल पर आदित्य ठाकरे ने कहा कि यदि सचिन अहीर उनके खिलाफ चुनाव भी लड़ते हैं तो इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने बताया कि अहीर ने मंगलवार सुबह उन्हें संदेश भेजकर कहा था कि वह उनके खिलाफ चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन उन्होंने इसे केवल राजनीतिक बयान बताया। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी अहीर के खिलाफ संगठनात्मक स्तर पर उचित कार्रवाई करेगी।

आदित्य ठाकरे ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी अपने पुराने कार्यकर्ताओं की बजाय दूसरे दलों से आने वाले नेताओं को महत्वपूर्ण पद देकर सम्मानित कर रही है। उनके मुताबिक, यह राजनीतिक संस्कृति भाजपा के समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ भी न्याय नहीं करती।

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