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Maharashtra Civic Polls: अजित पवार के आरोपों पर BJP ने ऐसा क्यों कहा?

Sat, 03 Jan 2026 08:06 PM IST
आदर्श अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाज़ी का दौर शुरू हो गया है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार द्वारा पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (पीसीएमसी) में भ्रष्टाचार और बढ़ते कर्ज को लेकर लगाए गए आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक पलटवार किया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने अजित पवार को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि आरोप लगाने से पहले उन्हें आत्ममंथन करना चाहिए, क्योंकि अगर भाजपा भी पुराने मामलों को लेकर बोलना शुरू करे तो अजित पवार के लिए स्थिति बेहद असहज हो सकती है।

शनिवार को मीडिया से बातचीत में रविंद्र चव्हाण ने कहा कि अजित पवार यह स्पष्ट करें कि वे किस पार्टी पर आरोप लगा रहे हैं। क्या उनका इशारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा की ओर है, या फिर यह बयान सिर्फ चुनावी फायदे के लिए दिया गया है? चव्हाण ने कहा कि भाजपा ने हमेशा विकास और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी है और बिना ठोस सबूत के लगाए गए आरोप केवल राजनीतिक हताशा को दर्शाते हैं।

भाजपा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि अजित पवार का बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में नगर निगम और नगर निकाय चुनावों का माहौल बन रहा है। उन्होंने दावा किया कि पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम में 2017 से 2022 तक भाजपा के कार्यकाल में विकास कार्य हुए और उसके बाद प्रशासक की नियुक्ति की गई। अब 15 जनवरी को होने जा रहे निगम चुनावों से पहले इस तरह के आरोप राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा हैं।

रविंद्र चव्हाण ने भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के गठबंधन को मजबूत बताते हुए कहा कि इसका असर ज़मीनी स्तर पर दिख रहा है। उन्होंने कल्याण-डोंबिवली सहित कई स्थानों पर भाजपा उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने का हवाला देते हुए कहा कि विपक्ष लगभग मैदान से बाहर हो चुका है।

इससे पहले अजित पवार ने नगर निकाय चुनावों में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट दिए जाने पर उठे सवालों का बचाव किया था। उन्होंने कहा कि जब तक कोई व्यक्ति अदालत में दोषी साबित नहीं हो जाता, तब तक उसे अपराधी नहीं कहा जा सकता। पवार ने अपने ऊपर लगे करीब 70 हजार करोड़ रुपये के कथित सिंचाई घोटाले के आरोपों का ज़िक्र करते हुए कहा कि वर्षों से उन पर आरोप लगाए जा रहे हैं, लेकिन अब तक कुछ साबित नहीं हुआ।

हालांकि, एनसीपी द्वारा ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिए जाने को लेकर विवाद और गहरा गया है, जिन पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं और जो फिलहाल जेल में हैं। विपक्ष का आरोप है कि यह नैतिकता और सुशासन के दावों के खिलाफ है, जबकि एनसीपी इसे कानून के सिद्धांतों से जोड़कर देख रही है।

नगर निकाय चुनावों से पहले भाजपा और एनसीपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप ने महाराष्ट्र की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में यह टकराव और तेज होने की संभावना है, क्योंकि दोनों ही पक्ष एक-दूसरे को घेरने का कोई मौका छोड़ने के मूड में नहीं दिख रहे।

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